स्टार्टअप बिजनेस क्या है? जानिए क्या है, स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम!

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स्टार्टअप बिजनेस क्या है? जानिए क्या है, स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम!

स्टार्टअप बिजनेस” क्या है? जानिए क्या है स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम! इस  अतयंत महत्वपूर्ण ब्लॉगपोस्ट में आपका स्वागत है।

इस ब्लॉगपोस्ट में हम आपको स्टार्टअप बिजनेस क्या है? क्या है स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम? किस इकाई को स्टार्टअप बिजनेस माना जाएगा?

स्टार्टअप इंडिया योजना के लाभ, स्टार्टअप बिजनेस पंजीकरण करने की प्रक्रिया! से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

विगत कुछ वर्षों से हमारे देश में स्टार्टअप संस्कृति ने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है। हरतरफ स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम की धूम मची हुई है।

आइए हम भी हर चीज को बारीकी से समझते हैं।

 स्टार्टअप बिजनेस क्या है?

ऐसी कोई नई तकनीक या नया यूनिक व्यवसाय मॉडल जिसे अभी तक कोई नहीं जानता वह स्टार्टअप बिजनेस होता है।

स्टार्टअप बिजनेस एक फर्म है जो अपने संचालन के प्रारंभिक चरण में है। ये फर्म शुरू में अक्सर अपने संस्थापक उद्यमी के नियंत्रण में रहती हैं।

संस्थापक उद्यमी किसी नवाचार उत्पाद या सेवा को विकसित कर बाजार में उतारने के लिए प्रयासरत रहता है।

सरल शब्दों में स्टार्टअप बिजनेस एक व्यक्ति अथवा कुछ व्यक्तियों के समूह द्वारा शुरू किया गया एक नया व्यवसाय है।

यह बिजनेस दूसरे व्यवसायों से कुछ भिन्न होता है।

इसके द्वारा किसी ऐसे नए उत्पाद या सेवा की आपूर्ति की जाती है, जो इसके पहले कहीं भी कभी भी प्रदान नहीं की जा रही थी।

यह आम जनता की किसी समस्या के हल स्वरूप विकसित किया जाता  है।

तात्पर्य यह कि स्टार्टअप बिजनेस तब जन्म लेता है,जब संस्थापक कोई नए उत्पाद या सेवा को विकसित करता है।

किसी मौजूदा उत्पाद या सेवा का पुनर्विकास कर कुछ बेहतर बनाता है। इस समय स्टार्टअप बिजनेस अपनी शिशु अवस्था में होता  है।

उसको अपना अस्तित्व बनाए रखना बहुत कठिन होता है। उसे हर क्षेत्र में मदद एवं संरक्षण की जरूरत होती है।

चूंकि स्टार्टअप बिजनेस का प्रारंभ अनोखे कार्य के संचालन से होता है।

इस प्रारंभिक चरण में जब तक उसकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत नहीं हो जाती उसका वित्तपोषण उसके संस्थापकों के लिए सरल नहीं होता।

इस कारण इस अवस्था में अधिकांश स्टार्टअप बिजनेस धनाभाव के कारण अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही असफल हो जाते हैं।

निवेशक भी प्रारंभ में स्टार्टअप बिजनेस को फायनांस करना पसंद नहीं करते, क्योंकि शुरुआत में उन्हें उनकी सफलता पर विस्वास नहीं होता है।

इस समय स्टार्टअप बिजनेस का सबसे महत्वपूर्ण कार्य अपने उत्पाद या सेवा को और अधिक विकसित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पूंजी इकट्ठा करना होता है।

स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम के माध्यम से सरकार ने इन नव उद्यमियों को वित्तीय एवं अन्य सुविधाएं प्रदान कर इन्हें आगे बढ़ाने की पहल की है।

सरकार द्वारा स्टार्टअप बिजनेस को प्रोत्साहित करने के कारण यह युवावर्ग के लिए करियर का एक बेहतरीन विकल्प बन गया है |

नि:संदेह स्टार्टअप बिजनेस युवाओं को उद्योगपति बनने का एक सुअवसर प्रदान करता है।

क्या है स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम ?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, 16 जनवरी, 2016 को भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम को शुरू किया है

यह भारत में नवाचारों के पोषण और सशक्तिकरण के लिए एक मजबूत इको-सिस्टम बनाने की योजना है।

स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम से हमारे देश में समृद्धि आएगी। हमारी अर्थव्यवस्था तो विकसित होगी ही, वहीं  रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलना तय है।

स्टार्टअप हमेशा जोखिम भरे प्रस्ताव होते हैं, स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम उन्हें पर्याप्त सक्रिय समर्थन और अनेकों स्तरों पर प्रोत्साहन देकर उद्यमशीलता और आर्थिक विकास दोनों को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

इसके द्वारा ऐसे उद्यमी भी लाभान्वित होंगे जो अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन धनाभाव तथा संसाधनों की कमी के कारण वे अपनी प्रतिभा एवं उर्जा का उपयोग नहीं कर पाते हैं।

स्टार्टअप का विकास  संपूर्ण देश में छोटे बड़े शहर, अर्ध शहर, ग्रामीण क्षेत्र में तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी।

तथा एस सी एस टी एवं महिला वर्ग उद्यमिता के प्रति प्रोत्साहित होंगे।

अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक नवयुवकों हेतु “स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम एक बेहतरीन योजना है।

स्टार्टअप इंडिया योजना द्वारा सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक नवोदित व्यवसायों को नवोदित उद्यमियों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

स्टार्टअप इंडिया योजना यह 19-सूत्रों की स्टार्टअप इंडिया कार्य योजना है।

इसमें ₹10,000 करोड़ का कोष, व्यवसाय स्थापना में आसानी, अनेक इन्क्यूबेटर सेंटर कर में छूट, सरल पेटेंट फाइलिंग, एवं अन्य अनेक लाभ तथा सेवाएं शामिल हैं।

सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक प्रतिभाशाली उद्यमी स्टार्टअप इंडिया स्कीम में सम्मिलित होकर योजना से लाभान्वित हों।

स्टार्टअप इंडिया स्कीम के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट यानी स्टार्टअप इंडिया startupindia.gov.in  पर भी जा सकते हैं।

 

किस इकाई को स्टार्टअप बिजनेस माना जाएगा?

डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT)  की अधिसूचना अनुसार  स्टार्टअप बिजनेस उस इकाई को माना जाएगा जो निम्न शर्तों के अनुरूप है :

आपका संस्थान निम्नानुसार एक रजिस्टर्ड कानूनी इकाई होना चाहिए।

अ. कंपनी अधिनियम, 2013 में परिभाषित किये अनुसार एक निजी लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत
कंपनी।

ब. साझेदारी अधिनियम 1932 की धारा 59 के तहत  पंजीकृत साझेदारी (भागीदारी) फर्म।

स. भारत में सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 के तहत पंजीकृत सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) फर्म।

2. आपकी फर्म को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (DIPP) से अनुमोदन प्राप्त होना चाहिए।

3. फर्म निगमन / पंजीकरण की तारीख से दस साल से ज्यादा पुरानी नहीं होना चाहिए।

4. किसी भी वित्तीय वर्ष में निगमन / पंजीकरण के बाद, आपकी इकाई का टर्नओवर ₹ 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हुआ है।

5. इकाई  द्वारा नवाचार, विकास या उत्पादों, प्रक्रियाओं या सेवाओं के सुधार की दिशा में काम किया जा रहा है।

धन और रोजगार सृजन के लिए उच्च क्षमता के साथ स्केलेबल बिजनेस मॉडल होना चाहिए।

6.आपका स्टार्टअप मौजूदा व्यवसाय के विभाजन या पुनर्निर्माण द्वारा नहीं बनाया गया है।

एवं रोजगार या धन सृजन की उच्च क्षमता वाला एक स्केलेबल व्यवसाय मॉडल है।

7. एक इनक्यूबेशन (ऊष्मायन) का आपके पास एक सिफारिशी पत्र होना चाहिए

8. भारतीय पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय से संरक्षक गारंटी आवश्यक है

9. बिजनेस को निम्न में से किसी एक के द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए, निजी इक्विटी फंड, एंजेल फंड या इनक्यूबेशन फंड,

10. धन संबंधी सभी विवरण सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के पास पंजीकृत होने चाहिए।

आपका व्यवसाय भारत में निगमित / पंजीकृत होना चाहिए।

स्टार्टअप इंडिया योजना के लाभ

1.सरल पंजीकरण प्रक्रिया

सरकार द्वारा स्टार्टअप्स के पंजीकरण को सरल  बनाने  के लिए एक मोबाइल ऐप और एक वेबसाइट लॉन्च किया गया है।

स्टार्टअप स्थापित करने के लिए आपको वेबसाइट पर जाकर केवल एक साधारण फॉर्म भरना है। एवं कुछ दस्तावेज अपलोड करने हैं।

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। मोबाइल ऐप से सिंगल विंडो क्लीयरेंस मिल जाता है।

यह ऐप स्टार्टअप को मंजूरी, पंजीकरण, फाइलिंग अनुपालन आदि के लिए एकल-खिड़की की सुविधा प्रदान करता है।

2.  सरल अनुपालन सुविधाएं

स्टार्टअप उद्यमी अपने उद्यम के विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सके, इस हेतु विभिन्न कानूनों के तहत उन्हें  सरल अनुपालन सुविधाएं एवं छूट प्रदान की जा रही है।

व्यावसायिक फर्मों को कंपनी अधिनियम, फेमा, श्रम, और पर्यावरण कानूनों जैसे अनेकों कानूनों का सख्ती से अनुपालन करना अत्यंत आवश्यक है।

इको-सिस्टम में नए होने के कारण अक्सर स्टार्टअप उनका पालन नहीं कर पाते हैं।

स्टार्टअप्स के सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नियामक बोझ को कम कर दिया है।

अनेकों कानून के अनुपालन में ढेरों छूट दी गई है। ताकि वे अपना ध्यान मुख्य व्यवसाय पर केंद्रित रख सकें

स्टार्टअप बिजनेस को कानूनों के अनुपालन को स्व-प्रमाणित करने की अनुमति दी गई है।

इन मामलों में तीन साल की अवधि के लिए उनका कोई निरीक्षण नहीं किया जाएगा।

3. खर्चों में कमी

स्टार्टअप इंडिया योजना द्वारा उद्यमी की मूल्यवान बौद्धिक संपदा की रक्षा के लिए इस योजना के तहत कई कदम उठाए गए हैं।

स्टार्टअप बिजनेस को सरकार पेटेंट और ट्रेडमार्क के सुगमकर्ताओं की सूची प्रदान करती है।

साथ ही आवेदन की सुविधा एवं पेटेन्ट आवेदनों की फास्ट-ट्रैक परीक्षा भी शामिल है।

पेटेंट दाखिल होने के बाद पेटेंट मूल्य का 80% की छूट भी दी जाती है।

सरकार सभी सुविधा शुल्क वहन करती है। स्टार्टअप बिजनेस को केवल वैधानिक शुल्क वहन करना है।

4.  आसान फंड की सुविधा

सरकार द्वारा, स्टार्टअप्स को धन उपलब्ध कराने के लिए,₹10,000 करोड़ का कोष, उद्यम पूंजी के रूप में,   स्थापित किया है।

सरकार बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को उद्यम पूंजी प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ साथ ऋणदाताओं को गारंटी भी दे रही है।

5.  आयकर में छूट

स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत पंजीकृत स्टार्टअप को इंटर-मिनिस्ट्रियल बोर्ड (IMB) से सर्टिफिकेशन प्राप्त करने पर 3 साल के लिए आयकर से छूट दी जाएगी,

इसके अतिरिक्त, स्वर्गदूतों द्वारा किए गए निवेश को भी इस योजना के तहत छूट दी गई है।

6. सरकारी निविदाओं के आवेदन में छूट की पात्रता

स्टार्टअप इंडिया ने स्टार्टअप्स और अनुभवी उद्यमियों दोनों के लिए समान अवसरों का मार्ग प्रशस्त किया है।

अब स्टार्टअप बिजनेस सरकारी निविदाओं के लिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं।

उन्हें सरकारी निविदाओं के लिए लागू “पूर्व अनुभव / is अपेक्षित कारोबार/ ’टर्नओवर” मानदंड आदि शर्तों में ढील दी गई है।

7. निवेशकों के लिए टैक्स की बचत

सरकार द्वारा उद्यम निधि सेटअप में अपने पूंजीगत लाभ का निवेश करने वाले लोगों को पूंजीगत लाभ से छूट मिलेगी।

इससे स्टार्टअप को अधिक निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

8. अपना निवेशक चुनें

निवेशकों को उद्यम निधि सेटअप में पूंजीगत लाभ  योजना के बाद, स्टार्टअप बिजनेस के पास उद्यम पूंजीपति के बीच चयन करने का विकल्प होगा।

इससे उन्हें अपने निवेशकों को चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी।

9) एक इनक्यूबेटर सेटअप

स्टार्टअप इंडिया योजना में एक इनक्यूबेटर मॉड्यूल शामिल है।  यह मॉड्यूल सार्वजनिक-निजी भागीदारी का समर्थन करता है।

मॉड्यूल स्टार्टअप को अपेक्षित ज्ञान और समर्थन देता है जो स्टार्ट-अप द्वारा आवश्यक होते हैं।

वर्तमान में, 118 इन्क्यूबेटर्स पूरे भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम को शक्ति प्रदान कर रहे हैं, जिससे स्टार्टअप इकोसिस्टम की मदद की जा रही है।

10. अनुसंधान एवं नवाचार लाभ

स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम उन लोगों के बीच अनुसंधान और नवाचार को भी प्रोत्साहित करता है, जिनके पास उद्यमी होने की आकांक्षा है।

सात नए अनुसंधान पार्क स्थापित करते हुए स्टार्टअप्स को रिसर्च एवं डेवलपमेंट में सुविधाएं प्रदान की जावेगी।

ये पार्क यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों और स्टार्टअप को उनके उत्पादों / सेवाओं के अनुसंधान और विकास के लिए सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

11.  नेटवर्किंग विकल्प

इस योजना के तहत, स्टार्टअप बिजनेस को किसी विशेष स्थान और समय पर अन्य स्टार्टअप हितधारकों से मिलने के अवसर मिलते हैं।

ये बैठकें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर  साल में दो बारआयोजित की जाती हैं।

इनसे स्टार्टअप बिजनेस को फंडिंग की तलाश करने का अवसर भी प्राप्त हो जाता है।

दूसरे स्टार्टअप्स को विकसित होता देखते हुए स्वयं के विकास की प्रेरणा मिलती है।

यह उन्हें अपने दैनिक गतिविधियों के साथ एक व्यापक दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।

12. आसान निकास

बाहर निकलने के मामले में – एक स्टार्टअप अपने व्यवसाय को बंद करने के आवेदन की तारीख से 90 दिनों के भीतर बंद कर सकता है

 स्टार्टअप बिजनेस पंजीकरण करने की प्रक्रिया!

अपने स्टार्टअप बिजनेस का स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम में रजिस्ट्रेशन करने की चरण दर चरण निम्नानुसार है:

 चरण 1: अपने व्यवसाय का कानूनी संरचना अंतर्गत पंजीकरण करवाएं।

सबसे पहले आपको अपने स्टार्टअप बिजनेस को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पार्टनरशिप फर्म या सीमित देयता भागीदारी के रूप में पंजीयन करना होगा।

इसके लिए आपको किसी भी व्यवसाय के पंजीकरण के लिए की जाने वाली सभी सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

इसमें  निगमन / भागीदारी पंजीकरण, पैन, और अन्य आवश्यक अनुपालन प्रमाणपत्र प्राप्त करना शामिल है।

वर्तमान में स्टार्टअप बिजनेस के लिए फंडिंग के अनेक  स्त्रोत उपलब्ध हैं, उद्यम पूंजीपति, क्राउडफंडिंग, ऋण।

इसलिए  स्टार्टअप बिजनेस को बहुत सोच समझकर अपने व्यवसाय एवं उसकी कानूनी संरचना का चयन करना चाहिए ।

यहां हम अपने अनुभव के आधार पर एक स्टार्टअप बिजनेस को एक व्यक्ति कंपनी (ओपीसी) बनाने की रिकमंडेशन करते हैं ।

एक व्यक्ति कंपनी, निजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सीमित देयता भागीदारी सभी की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया लगभग एक समान है अधिक जानकारी के लिए पढ़ें।

एक व्यक्ति कंपनी (ओपीसी) रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं

चरण 2: स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत पंजीकरण करें

दूसरे चरण में आपको सरकार की स्टार्टअप इंडिया योजना में एक स्टार्टअप के रूप में अपनी फर्म या कंपनी को पंजीकृत करना है।

स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत स्टार्टअप को पंजीकृत करने की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है।

आप इसे घर बैठे ऑनलाइन कर सकते हैं। सबसे पहले स्टार्टअप इंडिया की वेबसाइट पर लॉग इन करना है।

इस वेबसाइट पर स्टार्टअप बिजनेस पंजीकरण के लिए उपलब्ध फॉर्म को भरना है।

आपको अपनी व्यक्तिगत एवं स्टार्टअप बिजनेस संबंधी जानकारी नाम पता मोबाइल नंबर ईमेल स्टार्टअप संबंधी विवरण भरने होंगे।

विवरण अनुसार  कुछ प्रासंगिक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे।

इन विवरणों को दर्ज करने के बाद, आपकी स्टार्टअप इंडिया प्रोफाइल निर्मित हो जाएगी।

वेबसाइट पर आपकी प्रोफ़ाइल बनने के बाद आपका स्टार्टअप बिजनेस विभिन्न सुविधाओं के लिए आवेदन कर सकता है।

जैसे एक्सेलेरेशन, इनक्यूबेटर / मेंटरशिप कार्यक्रमों और वेबसाइट पर अन्य चुनौतियों के साथ लर्निंग एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम, गवर्नमेंट स्कीम्स, स्टेट पॉलिसी फॉर स्टार्टअप्स और प्रो-फ्री जैसे संसाधन आदि।

 

चरण 3:  DPIIT से मान्यता प्राप्त करें

स्टार्टअप इंडिया वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाने के बाद अगला कदम है, डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) से रिकॉग्निशन मान्यता प्राप्त करना।

यह मान्यता स्टार्टअप बिजनेस को विभिन्न सुविधाओं का लाभ लेने में सक्षम बनाती है।कुछ लाभ इस प्रकार हैं

-उच्च गुणवत्ता वाले बौद्धिक संपदा सेवाओं और संसाधनों तक पहुंच,
-सार्वजनिक खरीद मानदंडों में छूट,
-श्रम और पर्यावरण कानूनों के तहत स्व-प्रमाणन,
-कंपनी की आसान घुमावदार फंड की निधि तक पहुंच, -लगातार 3 वर्ष के लिए कर छूट आदि।

डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त करने के लिए, यदि आप एक नए उपयोगकर्ता हैं तो ogn Get Recognized ’बटन पर क्लिक करें।

यदि आप एक मौजूदा उपयोगकर्ता हैं तो ‘डैशबोर्ड बटन’ पर और फिर ‘डीपीआईआईटी मान्यता’ पर क्लिक करें।

आपके समक्ष  ‘मान्यता एप्लिकेशन विवरण’ पृष्ठ खुल जाएगा। इस पृष्ठ पर पंजीकरण विवरण अनुभाग के तहत ‘विवरण देखें’ पर क्लिक करें।

स्टार्टअप पहचान फॉर्म में आवश्यक विवरण भरें। तथा आखिर में सबमिट’ बटन पर क्लिक करें।

चरण 4: पीडीएफ प्रारूप में दस्तावेज़ अपलोड करना

  स्टार्टअप इंडिया वेबसाइट पर अपने स्टार्टअप बिजनेस को पंजीकृत करने के लिए पंजीकरण फॉर्म के साथ आपको निम्नानुसार दस्तावेज पीडीएफ फार्मेट में अपलोड करने  की आवश्यकता होती है:

(1) अनुशंसा पत्र:

निम्नलिखित दस्तावेजों में से किसी एक को सिफारिश पत्र के रूप में प्राप्त किया जा सकता है:

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (DIPP) द्वारा निर्दिष्ट प्रारूप में, भारत में स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्थापित इनक्यूबेटर से आपके व्यवसाय की नवीन प्रकृति के बारे में एक सिफारिश;  या

एक इनक्यूबेटर द्वारा सहायता का एक पत्र, जो नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किसी भी निर्दिष्ट योजना के हिस्से के रूप में भारत सरकार द्वारा परियोजना के संबंध में वित्त पोषित है;  या

डीआईपीपी निर्दिष्ट प्रारूप में भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर से व्यवसाय की अभिनव प्रकृति के बारे में सिफारिश का एक पत्र;  या

किसी भी इनक्यूबेशन फंड / एंजेल फंड / प्राइवेट इक्विटी फंड / एक्सेलेरेटर / एंजेल नेटवर्क द्वारा इक्विटी में 20% से कम नहीं के वित्त पोषण का एक पत्र, जो सेबी के साथ पंजीकृत है जो व्यवसाय की नवीन प्रकृति का समर्थन करता है;  या

नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किसी निर्दिष्ट योजना के तहत भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषण का एक पत्र;  या

भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा व्यवसाय को बढ़ावा देने की प्रकृति से जुड़े क्षेत्रों में जर्नल में प्रकाशित और प्रकाशित एक पेटेंट।

(2) निगमन / पंजीकरण प्रमाणपत्र:

पंजीकरण फॉर्म के साथ, आपको अपनी कंपनी / एलएलपी (भागीदारी के मामले में पंजीकरण प्रमाणपत्र) को शामिल करने का प्रमाण पत्र (यथा स्थिति) अपलोड करना होगा।

(3) स्टार्टअप का संक्षिप्त विवरण:

आपके स्टार्टअप बिजनेस  का विवरण संक्षेप में- आपके उत्पादों / सेवाओं की नवीन प्रकृति का संक्षिप्त विवरण भी आवश्यक है।

निदेशकों का विवरण, पिच डेक / वेबसाइट लिंक / वीडियो जैसी अवधारणा का प्रमाण (एक मान्यता / प्रारंभिक कर्षण / स्केलिंग स्टेज स्टार्टअप के मामले में)
पेटेंट और ट्रेडमार्क विवरण (वैकल्पिक), पैन नंबर

चरण 5: यदि आपको कर छूट की आवश्यकता है, तो आपको उल्लेख करना होगा

  स्टार्टअप को पहले तीन वर्षों के लिए आयकर का भुगतान नहीं करना पड़ता है।

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए,आपके स्टार्टअप  को अंतर-मंत्रालय बोर्ड (IMB) द्वारा प्रमाणित होना चाहिए।

यह वह जगह है जहां डीआईपीपी के साथ पंजीकृत कंपनियों को छूट मिलती है क्योंकि पंजीकरण लाभ प्राप्त करने के लिए यह पर्याप्त है।

 चरण 6: स्व-प्रमाणन प्रदान करना

अंतिम चरण में आपको यह प्रमाणित करना है कि आप निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हैं।

आपने अपने स्टार्टअप बिजनेस को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पार्टनरशिप फर्म या सीमित देयता भागीदारी फर्म के रूप में (यथा स्थिति) पंजीकृत किया है।

आपका स्टार्टअप बिजनेस भारत में10 वर्षों के पहले शामिल / पंजीकृत किया गया है।

आपके स्टार्टअप बिजनेस का टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।

आपका स्टार्टअप कुछ नवाचार करने की दिशा में काम कर रहा है। या मौजूदा प्रणाली को अपने तरीके से बेहतर बना रहा है।

आपका स्टार्टअप बिजनेस एक नया विचार है एवं मौजूदा व्यवसाय का विभाजन या पुनर्निर्माण नहीं है।

चरण 7: अपनी पहचान संख्या प्राप्त करें

सफलतापूर्वक आवेदन करने पर आपको तत्काल प्रभाव से अपने स्टार्टअप बिजनेस के लिए एक मान्यता संख्या मिल जाएगी।

प्राधिकारी के द्वारा, आपके सभी अपलोड किए गए दस्तावेज़ों की जांच के बाद ही आपको आपका मान्यता का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया जाता है।

दस्तावेजों को अपलोड करते समय आपको पूरी सावधानी बरतना चाहिए।

यदि बाद में सत्यापन करने पर, यह पाया गया  कि आवश्यक दस्तावेज अपलोड नहीं किया गया है / गलत दस्तावेज अपलोड किया गया है या जाली दस्तावेज अपलोड किया गया है, तो आपको अपने स्टार्टअप की भुगतान की गई पूंजी का 50% का जुर्माना भरना होगा। यह जुर्माना न्यूनतम ₹25,000 होता है।

निष्कर्ष:-

अब जब आपको एक स्टार्टअप बिजनेस के लिए पात्रता और पंजीकरण मानदंड की जानकारी मिल गई है तो जरूर इसका फायदा उठाएं।

अपने स्टार्टअप के साथ-साथ स्टार्टअप इंडिया स्कीम में दाखिला लें और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सभी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करें।

आपको यह लेख कैसा लगा कमेंट्स करके जरूर बताएं। यदि अच्छा लगा तो इसे अधिक से अधिक शेयर करें, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित हो सकें।

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