बिजनेस लोन उद्यम की उन्नति हेतु आवश्यक वित्त जुटाने का बेहतरीन साधन

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बिजनेस लोन उद्यम की उन्नति हेतु आवश्यक वित्त जुटाने का बेहतरीन साधन।

“बिजनेस लोन उद्यम की उन्नति हेतु आवश्यक वित्त जुटाने का बेहतरीन साधन ” ब्लॉग पोस्ट लिखने का मेरा मुख्य उद्देश्य है, हर उद्यमी को बिजनेस लोन से संबंधित बुनियादी एवं आवश्यक ज्ञान उपलब्ध कराना है।

इसके अध्ययन के बाद जब भी आपको बिजनेस लोन की आवश्यकता होगी, आप अपनी जरूरत अनुसार सही बिजनेस लोन का सरलता से चयन कर सकेंगे।

आज छोटे व्यवसायियों के लिए बाजार में विभिन्न प्रकार के बिजनेस लोन उपलब्ध हैं।

ये व्यवसाय के अनेकों विशिष्ट उद्देश्यों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

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सभी बिजनेस लोन उत्पादों की अपनी-अपनी अद्वितीय योग्यताएं एवं आवश्यकताएं हैं।

हर बिजनेस लोन में अंतर ऋण अवधि, ब्याज का प्रकार, उधार राशि और लचीलेपन के कारण दिखाई देता है।

यह बैंक से बैंक में भी भिन्न होता है कि वे किसी उद्यमी को कितना ऋण दे सकते हैं।

सभी ऋणदाताओं के बिजनेस लोन वितरित करने के अपने अपने तरीक़े तथा नियम और शर्तें हैं।

इसी तरह सभी उद्यम भी उनके उद्देश्य, आकार और जटिलता में एक दूसरे से भिन्न- भिन्न  होते हैं।

उनकी वित्तीय आवश्यकताएं और जोखिम की स्थिति भी एक दूसरे से अलग-अलग होती हैं।

हालांकि, सभी उद्यमों को कार्य करने और बढ़ने के लिए हर स्तर पर वित्तपोषण की जरूरत होती ही है। जिसे वे बिजनेस लोन लेकर पूरा कर सकते हैं।

पैसा उधार लेना उतना सरल नहीं है, जितना आप समझ रहे हैं।

आइए हर एक महत्वपूर्ण बिन्दु पर चर्चा करते हैं।

बिजनेस लोन क्या है ?

बिजनेस लोन उद्यमी को अपने उद्यम की उन्नति के लिए आवश्यक वित्त तक पंहुचने का तरीका प्रदान करते हैं।

बिजनेस लोन एक तरह से उद्यमी के लिए वित्तीय मदद है। जिसे वह ऋण दाता से उधार प्राप्त कर सकता है।

इसका उपयोग आप अपने उद्यम के बुनियादी ढांचे, स्थाई संपत्ति खरीदने, संचालन और ऐसी अनेक व्यावसायिक जरुरतों में निवेश के लिए कर सकते हैं।

इस उधार ली गई राशि को आपको शुल्क (ब्याज) सहित ऋणदाता को  वापिस भी करना होता है।

बिजनेस लोन क्यों लें ?

प्रत्येक उद्यमी की बिजनेस लोन की आवश्यकता भिन्न भिन्न हो सकती है। सामान्यतया निम्न जरूरतों को पूरा करने के लिए उद्यमी ऋण लेता है।

एक नया व्यापार शुरू करने के लिए।
व्यापार का विस्तार करने के लिए।
व्यापार स्थान का विस्तार करने के लिए।
भूमि कारखाना दुकान पट्टे पर लेने के लिए।
स्थाई संपत्ति खरीदने हेतु।
नवीनतम तकनीक में अपग्रेड करने हेतु
नई मशीनरी उपकरण फर्नीचर अन्वायुक्ति खरीदने हेतु।
बड़े कार्यालय परिसर को लीज पर लेने हेतु
अपने व्यवसाय के नकदी प्रवाह को सुदृढ़ बनाने हेतु।अपने कार्यालय का नवीनीकरण करने हेतु
अधिक माल खरीदने के लिए।
कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं ओवरहेड्स और वेतन जैसे बुनियादी परिचालन खर्चोंके लिए।
व्यापार में नई प्रतिभाओं को लाने के लिए।

किसी व्यवसाय को कार्य करने और बढ़ने के लिए हर स्तर पर वित्तपोषण की आवश्यकता होती है।

बिजनेस लोन का वर्गीकरण

बिजनेस लोन, कहें, वाणिज्यिक या व्यापारिक ऋण कहें, या व्यावसायिक ऋण कहें, इन्हें दो प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है।

पेशेवर ऋण एवं ट्रेड ऋण :

पेशेवर ऋण:

इस ऋण को स्व-नियोजित पेशेवरों को जैसे डॉक्टर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, वकील, कंपनी सेक्रेटरी, आर्किटेक्चर एवं अन्य इसी तरह के लोगों को प्रदान किया जाता है

ट्रेड ऋण:

व्यवसाय ऋण छोटे बड़े सभी उद्यमियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार उपलब्ध कराया जाता है जिसे अभी हम आगे विस्तार से समझने वाले हैं।

बिजनेस लोन को उनकी अवधि के अनुसार उन्हें दो मुख्य प्रकार से बांटा गया है।

अल्पकालिक ऋण एवं  दीर्घकालिक ऋण

अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण, बिजनेस लोन को वापस भुगतान करने की अवधि को संदर्भित करते हैं

अल्पकालिक ऋण:

शॉर्ट टर्म लोन की धन वापसी का समय कम होता है। आमतौर पर इसे कुछ महीनों या एक साल के भीतर चुका दिया जाता है।

दीर्घकालिक ऋण:

इस ऋण की धन वापसी का समय लंबी अवधि तक के लिए होता है। यह चुकौती कुछ वर्षों तक कई वर्षों (जैसे 10-15) वर्षों तक रह सकती है।

सुरक्षा की दृष्टि से पुन: इन्हें दो वर्गों में बांटा जाता है।

सुरक्षित ऋण एवं असुरक्षित ऋण

सुरक्षित ऋण:

इस  ऋण के अंतर्गत उधारकर्ता को ऋणदाता के पास उधार लिए गए धन के विरुद्ध संपार्श्विक की आवश्यकता होती है।

असुरक्षित ऋण:

इस ऋण के अंतर्गत उधारकर्ता को ऋणदाता के पास उधार लिए गए धन के विरुद्ध संपार्श्विक की जरूरत नहीं होती है।

यह अंतर आपकी ब्याज दर, उधार लेने की सीमा और पुनर्भुगतान की शर्तों को प्रभावित करता है।

बिजनेस लोन के प्रकार

विभिन्न प्रकार के बिजनेस लोन जो प्रचलन में हैं। एवं  आप (उद्यमी) जिनके लिए आवेदन  कर सकते हैं, नीचे उल्लेखित हैं।

टर्म लोन: (सावधि ऋण)

टर्म लोन को ही हिंदी में सावधि ऋण कहते हैं। बिजनेस  लोन का यह बहुत प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण विकल्प है।

सावधि ऋण विविध तरीकों में उपलब्ध है। शॉर्ट-टर्म लोन, (अल्पावधि ऋण) मिड-टर्म (मध्यावधि ऋण व लॉन्ग-टर्म लोन (दीर्घकालिक ऋण)।

अल्पकालिक ऋण की अवधि 12 महीने एक वर्ष की  होती है।

मध्यकालिक अवधि 5 से दस वर्षों की होती है। तथा 10 से 20 वर्ष  अवधि के ऋण को दीर्घकालिक ऋण कहते हैं।

ये ऋण पुनः दो भागों में विभाजित किए जा सकते हैं।
सुरक्षित ऋण तथा असुरक्षित ऋण।

सुरक्षित ऋण में, सुरक्षा के लिए के कोई संपत्ति, मशीनरी या व्यावसायिक जमीन को गिरवी रखा जाता है।

असुरक्षित ऋण को किसी संपार्श्विक कीआवश्यकता नहीं होती।

इस ऋण को  व्यापार अवधि ऋण, टर्म लोन भी कहते हैं। ये ऋण  बड़ी मात्रा में दीर्घकालिक अवधि के ऋण होते हैं।

इन्हें किसी विशेष जरूरत के लिए, अधिकतर पूंजीगत व्यय जैसे भूमि एवं भवन, भवन निर्माण, बुनियादी ढांचा निर्माण, नवीनीकरण, उपकरण, मशीनरी, वाहन खरीदने के लिए स्वीकृत किया जाता है।

टर्म लोन मानक प्रकार के ऋण हैं जो व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए हो सकते हैं।

इनका कार्यकाल तय है। यदि ऋण असुरक्षित है तो 1 से 5 साल के बीच। अगर सुरक्षित व्यापार ऋण के लिए 15 से 20 साल तक ।

असुरक्षित ऋण पर ब्याज दर अधिक होती है। सुरक्षित ऋण पर ब्याज दर कम रहती है।

इन ऋणों से जुड़ी ब्याज दरें 8% से 15% तक हो सकती हैं। ये नियत या अस्थायी हो सकती हैं। यह स्वीकृत ऋण राशि एवं देशकी आर्थिक स्थिति  निर्भर करता है।

लोन लेने हेतु उधारकर्ता से खरीदी जाने वाली संपत्ति का 15 से 25 प्रतिशत मूल्य मार्जिन मनी के रूप में जमा कराया जाता है।

कारण यह कि ऋण राशि कुल व्यय का 85% से 75 %  तक ही स्वीकृत की जाती है।

सावधि ऋण में एक साथ पूरी राशि वितरित कर दी जाती है।

आमतौर पर सावधि ऋण चुकाने  के लिए मासिक या त्रैमासिक भुगतान बराबर किस्तों में करना होता है।

बैंक टर्म लोन के लिए पात्रता थोड़ी मुश्किल से ही प्राप्त होती है।

टर्म लोन मानक प्रकार का ऋण हैं जो व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए लिया जा सकता है।

सावधि ऋण को विदेशी मुद्रा में भी लिया जा सकता है। इस स्थिति में इसे विदेशी मुद्रा ऋण कहा जाता है।

इस तरह का ऋण आमतौर पर निर्यातकों को जारी किया जाता है। इनके सौदे अलग मुद्रा में होते हैं ।

ये ऋण घरेलू ऋण की अपेक्षा सस्ते होते हैं। इसका कारण पूंजीगत रोजगार की लागत भारत के बाहर सस्ती है।

विदेशी मुद्रा ऋण में, ऋण राशि की गणना यूएस डॉलर में की जाती है ।

इसका भुगतान देश में भारतीय रुपयो में कारोबार के रूप में किया जाता है, एवं व्यापार द्वारा प्राप्त अमेरिकी डॉलर भुगतानों के विरुद्ध सेट किया जाता है।

ऋण स्वीकृति के लिए जिन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, उनमें शामिल हैं:

कम से कम 2 वर्षों के लिए व्यापार निरंतरता प्रमाण।

नियमित नकदी प्रवाह के साथ पिछले 2 वर्षों के बैंक स्टेटमेंट।

2  साल के लिए वेतन भुगतान।  उपयोगिता बिल, आदि।

पिछले 3 वर्षों के ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण बैलेंस शीट, लाभ और हानि विवरण आईटीआर के साथ।

निगमन प्रमाण पत्र / पंजीकरण या साझेदारी / ट्रस्ट डीड इत्यादि।

बोर्ड के संकल्पों के साथ, एमओए और एओए, कंपनी पैन कार्ड एवं पते की स्वप्रमाणित फोटोकॉपी  तथा अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची।

निदेशकों के व्यक्तिगत प्रमोटरों का केवाईसी पैन कार्ड और पते का स्वप्रमाणित छायाप्रति और प्रमाण।

कार्यशील पूंजी ऋणः

कार्यशील पूंजी ऋण, इस ऋण को वर्किंग कैपिटल लोन शॉर्ट टर्म लोन, अल्प अवधि  ऋण, अल्पकालिक ऋण इन नामों से भी जाना जाता है।

यह ऋण छः महीने से दो साल की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं। ये ऋण बिना संपार्श्विक उपलब्ध हैं।

इस ऋण का उपयोग व्यवसाय चलाने के लिए आवश्यक नकद प्रवाह में संतुलन बनाए रखने हेतु किया जा सकता है।

ऐसे उद्यमी जिन्हें पूरे वर्ष भर नियमित आय प्राप्त नहीं होती, मौसमी प्रकृति के उद्यम, लंबी प्रक्रिया से उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को अक्सर अपने रोजमर्रा के खर्चों के भुगतान के लिए नगद की कमी रहती है। उनके लिए यह बहुत उपयुक्त है।

ऑफ-सीजन के दौरान नकदी की कमी से निपटने या पीक सीजन के दौरान मांग को पूरा करने के लिए भी यह ऋण बहुत अधिक सहायक हो सकता है।

इसे आप रोजमर्रा के खर्चों के लिए, जैसे कि विज्ञापन, पेरोल या इन्वेंट्री खरीद के लिए, नगद की कमी को दूर करने के लिए भी उपयोग कर सकते हैं।

आप आपातकालीन लागत को कवर करने या ऋण का भुगतान करने के लिए भी इस ऋण का उपयोग कर सकते हैं।

कार्य शील पूंजी ऋण आमतौर पर बड़े, राष्ट्रीय बैंकों के साथ-साथ क्षेत्रीय या राज्यव्यापी बैंकों के माध्यम से भी लिएं जा सकते हैं।

आपको इस ऋण को उसी बैंक से लेना चाहिए जहां आपके व्यवसाय का खाता है।

यह आपकी तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए आसानी से स्वीकृत हो जाता है

इस ऋणपर ओवर ड्राफ्ट ऋण की अपेक्षा कम दरों पर ब्याज लगाया जाता है।

बैंक द्वारा ऋण पर ब्याज केवल उपयोग की गई राशि पर लिया जाता है, न कि पूरी स्वीकृत राशि पर।

कार्यशील पूंजी ऋण में, बैंक नियमित और लेखा परीक्षित तरीके से व्यवसाय के वित्तीय स्वास्थ्य की जांच करते रहते हैं।

इस तरह डिफ़ॉल्ट की जोखिम कम होने से अन्य ऋणों की अपेक्षा कार्यशील पूंजी ऋण देने में बहुत अधिक सहज रहते हैं।

संपत्ति के खिलाफ ऋण:

आवासीय, वाणिज्यिक या खाली भूमि को बैंक को संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में देकर संपत्ति के विरुद्ध ऋण लिया जा सकता है।

धन के लिए आवेदन करने पर पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
इसलिये संपत्ति के विरुद्ध ऋण के माध्यम से उठाए गए धन का उपयोग व्यवसाय द्वारा किसी भी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

आप इसका उपयोग एक नया व्यवसाय शुरू करने, पूंजी की आवश्यकता, व्यवसाय की दैनिक जरूरतों, विज्ञापन, अनुसंधान, व्यवसाय विस्तार, कर्मचारियों का वेतन,भूमि खरीदने पूंजीगत संपत्ति की आवश्यकता के लिए भी कर सकते हैं।

इसके लिए किसी मार्जिन की भी जरूरतत नहीं है। इस ऋण को उधारकर्ता की प्रोफाइल के आधार पर 3 से 15 वर्ष तक की अवधि के हेतु प्राप्त किया जा सकता है।

संपत्ति के मौजूदा बाजार मूल्य का 70% तक ऋणदाता को फायनांस किया जाता है।

संपत्ति का शीर्षक साफ और अतिक्रमण  मुक्त होना चाहिए।  गिरवी रखी गई संपत्ति मुकदमे से भी मुक्त होनी चाहिए।

ऋण का कार्यकाल ऋण संस्थान द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के आधार पर 15 – 20 वर्ष तक होता है।

बैंक ओवरड्राफ्ट ऋण:

बैंक ओवरड्राफ्ट ऋण एक सुविधा है, इसके तहत आप अपने बैंक अकाउंट से तब भी पैसे निकाल सकते हैं, जब उसमें बैलेंस ना हों।

एक निर्धारित सीमा तक बैंक से राशि प्राप्त कर सकते हैं इस तरह निकाली गई राशि ओवरड्राफ्ट कहलाती है।

बैंक ओवरड्राफ्ट सुविधा, इसे एक क्रेडिट लाइन के रूप में भी जाना जाता है।

इस निकाली गई राशि पर बैंक द्वारा ब्याज लिया जाता है। आपको पैसों की ज़रूरत हो, तब ओवरड्राफ्ट आपके काम आता है।

वित्तीय संस्थानों के द्वारा ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रतिभूतियों या संपार्श्विक के खिलाफ प्रदान की जाती है।

ऋणदाता द्वारा उधारकर्ता को ओवरड्राफ्ट सुविधा एक निश्चित सीमा तक राशि (बतौर लोन) निकालने की मंजूरी प्रदान की जाती है।

यह सीमा निर्धारित करने के लिए बैंकों द्वारा उधारकर्ता के क्रेडिट इतिहास, संस्थान के साथ संबंध, व्यावसायिक नकदी प्रवाह एवं चुकौती इतिहास का विश्लेषण किया जाता है।

यह एक रिवाल्विंग क्रेडिट सुविधा होती है, इसमें आप अपने बैंक के व्यापार खाते में शेष ना हो तो भी, स्वीकृत सीमा तक, राशि निकाल सकते हैं।

यह व्यापार में तत्काल धन प्राप्त करने के लिए संपूर्ण ऋण आवेदन प्रक्रिया को बाय-पास करने का एक तरीका है।

ओवरड्राफ्ट सुविधा के तहत आपको केवल उस विशिष्ट अवधि के लिए उपयोग की गई राशि पर ही ब्याज का भुगतान करना है।

जब तक आप मूलधन और ब्याज समय पर चुकाते रहेंगे तब तक आप किसी भी तरीके से इस ऋण का उपयोग कर सकते हैं।

व्यापारी नकद अग्रिम:

व्यापारी नकद अग्रिम सुविधा इसे मर्चेंट लोन एडवांस भी कहते हैं।

यह  उद्यम में नगदी की कमी से निपटने के लिए अच्छा विकल्प है। परंतु थोड़ा मंहगा साधन है।

इस सुविधा के द्वारा आप अपने उद्यम के दैनिक क्रेडिट कार्ड की बिक्री के लिए तुरंत नगद प्राप्त कर सकते हैं।

व्यापारी नकद अग्रिम तकनीकी रूप से ऋण नहीं बल्कि आपके व्यापारी खाते में जमा क्रेडिट कार्ड की बिक्री के आधार पर नकद अग्रिम है।

विशेष रूप से यह वित्तपोषण विकल्प आपके लिए महंगा भी हो सकता है।

क्योंकि उच्च वार्षिक प्रतिशत दरों पर ले जाता है जिसमें ऋण की कुल लागत और सभी शुल्क शामिल होते हैं।

व्यापारी नकद अग्रिम भी असुरक्षित ऋण है। अर्थात  संपार्श्विक की आवश्यकता नहीं होती है।

 कैश क्रेडिट सुविधा:

कैश क्रेडिट सुविधा आमतौर पर इसे ओवरड्राफ्ट के रूप में जाना जाता है। यह सुविधा एक अल्पकालिक उधार है।

बैंक यह सुविधा व्यापार की परिसंपत्तियों जैसे कच्चे माल प्रक्रियारत माल, स्टाक को गिरवी रखने पर लचीले ढंग से पैसे उधार लेने की अनुमति देता है।

नगद क्रेडिट सुविधा की लिमिट ड्रॉइंग पॉवर तक सीमित होती है। बैंकों द्वारा यह क्रेडिट लिमिट स्टॉक पर तय मार्जिन में कटौती के बाद निर्धारित की जाती है ।

मार्जिन 70 से 80 प्रतिशत उधारकर्ता की प्रोफाइल पर आधारित होती है।

बैंक यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि बकाया राशि आहरण शक्ति की सीमा से अधिक न हो। यह सुविधा कार्यशील पूंजी के वित्तपोषण के लिए बेहतरीन सुविधा है।

स्वीकृत ऋण का कार्यकाल हर साल समाप्त होता है। अतः उद्यमी को प्रति वर्ष इस सुविधा का नवीनीकरण कराना होता है।

क्रेडिट की व्यवसाय रेखा:

क्रेडिट की लाइनें सबसे लोकप्रिय प्रकार के व्यवसाय ऋणों में से एक है। व्यवसाय क्रेडिट की लाइन

यह ऋण सुविधा आपको ऑनलाइन ऋणदाता और पारंपरिक बैंक दोनों के द्वारा उपलब्ध कराई जा सकती है।

जब भी आपको अपने व्यवसाय के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो। आप इसका उपयोग कर सकते हैं।

क्रेडिट लाइन व्यापार ऋण एक व्यवसाय कार्ड की तरह काम करता है।

आवश्यकता होने पर आप क्रेडिट व्यवसाय ऋण की लाइन से नकद प्राप्त कर सकते हैं। इस पर ब्याज की दरें भी कम हैं।

यदि आप  एक छोटे व्यवसायी हैं, तो आपको क्रेडिट की लाइन ऋण सुविधा का लाभ अवश्य प्राप्त करना चाहिए। 

शेयरों या वित्तीय प्रतिभूतियों के खिलाफ ऋण:

शेयरों या वित्तीय प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर भी ऋण प्राप्त किया जा सकता है।

बैंकिग नियमों द्वारा अनुमोदित वित्तीय प्रतिभूतियों जैसे कि डीमैट शेयर, म्यूचुअल फंड यूनिट, फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी), एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), बीमा पॉलिसियों और बचत बांड के खिलाफ भी ऋण उठाया जा सकता है।

शेयरों या वित्तीय प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर उठाए गए धन का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

स्वीकृत ऋण का कार्यकाल हर साल समाप्त होता है।  इसलिए, इसे 12 महीने की अवधि के बाद नवीनीकृत करना होता है।

इस अवधि की गणना उस तारीख से की जाती है जिस दिन ऋण स्वीकृत होता है। मार्जिन की कोई आवश्यकता होती।

उपकरण ऋण:

मशीनरी ऋण /उपकरण ऋण सभी व्यवसायियों को अपने बिजनेस के लिए मशीनें एवं उपकरण खरीदने ही पड़ते हैं।

व्यवसायी अक्सर नए एवं महंगे उन्नत संयंत्र एवं मशीनें तथा उपकरण विदेशों से आयात करते हैं।

इनका सही उपयोग करने के लिए कर्मचारियों को इनके संचालन का प्रशिक्षण भी दिलाने की जरूरत होती है।

इन सब के लिए पर्याप्त मात्रा में धन की आवश्यकता होती है। जिसे मशीनरी/उपकरण  ऋण द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

आप भी अपने व्यवसाय के लिए नए संयंत्र मशीनरी एवं उपकरण के लिए अथवा उन्नयन (अपग्रेडेशन ) के लिए इस ऋण का उपयोग कर सकते हैं।

यह सुरक्षित ऋण की श्रेणी में आता है। इस ऋण से खरीदे हुए संयंत्र मशीनरी एवं उपकरण बतौर  संपार्श्विक रखे जाते हैं।

उधारकर्ता के डिफाल्टर होने पर संयंत्र मशीनरी एवं उपकरण जब्त किए जा सकते हैं।

ऋणराशि ₹ तीस लाख से दो करोड़ तक के लिए  उपलब्ध है। इसे तीन से पांच साल की अवधि के लिए जारी किया जाता है।

इसकी ब्याज दरें सावधि ऋण की दरों के अनुसार ही होती हैं।

कुछ एनबीएफसी बिना संपार्श्विक छोटे व्यवसायियों को असुरक्षित ऋण के रूप में भी यह ऋण जारी करते हैं।
ब्याज दरें भी सावधि ऋण की अपेक्षा कम होती हैं।

उधारकर्ता को संपार्श्विक की प्रतिज्ञा की भी जरूरत नहीं होती है। वह डिफ़ॉल्ट पर परिसंपत्ति जब्ती के किसी भी जोखिम के बिना अग्रिम चुका सकता है।

 चालान वित्तपोषण:

व्यवसाय में नगद की कमी को दूर करने हेतु चालान वित्तपोषण एक शक्तिशाली साधन है।

चालान वित्तपोषण को इनवॉयस वित्तपोषण,चालान छूट या चालान फैक्टरिंग के नाम से भी जाना जाता है।

इस तरह की फंडिंग छोटे व्यवसायों के लिए बहुत मददगार होती है।

जब आप चालान बढ़ाते हैं एवं उस चालान का भुगतान प्राप्त होता है, तो इसके बीच अक्सर लंबा अंतराल होता है।

ऐसी स्थिति में, आप चालान के खिलाफ ऋण के लिए लिए बैंक से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं।

बैंक अथवा चालान वित्तपोषण कंपनियां बकाया चालानों का 85% तुरंत नकद प्रदान कर देती हैं।

शेष 15% तब देती हैं, जब ग्राहक पूरे चालान का भुगतान कर देता है।

ऋणदाता इस राशि से शुल्क और ब्याज की कटौती कर लेता है।

लेटर ऑफ क्रेडिट:

लेटर ऑफ क्रेडिट, क्रेडिट का पत्र, ऋण पत्र (एलसी) यहभुगतान का एक बेहतरीन विकल्प है जो मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उपयोग किया जाता है।

विदेशों में कारोबार करने वाले उद्यमों को अनजान व्यापारियों से व्यापार करना होता है। व्यवसायी कोई भी सौदा करने से पहले भुगतान की गारंटी चाहते है।

बैंक खरीदार या माल के आयातक की ओर से ऋण पत्र जारी करता है।

यह बैंक द्वारा खरीदार की तरफ से, विक्रेता को कुछ निश्चित शर्तों के तहत भुगतान करने की दी गई गारंटी है।

भुगतान प्राप्त करने के लिए, विक्रेता को निर्धारित शर्तों को पूरा करना होता है यथा आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।

लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) सुविधा ऋण प्राप्त करने के लिए उधारकर्ता को प्रोफाइल के आधार पर 60 से 80 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करने की जरूरत होती है।

आमतौर पर लेटर ऑफ क्रेडिट का कार्यकाल 12 महीने का होता है। अवधि खत्म होने पर फिर से नवीकरण करवाया जा सकता है।

 गोल्ड लोन:

गोल्ड लोन का लाभ लेने के लिए आप अपने सोने के गहने, सोने के सिक्के, और सोने के आभूषण जैसी चीजों का उपयोग कर सकते हैं।

इस ऋण द्वारा प्राप्त की गई धनराशि का उपयोग आप किसी भी उद्देश्य के लिए कर सकते हैं।

हालांकि, बैंकों द्वारा प्रति व्यक्ति ₹ 20 लाख से अधिक गोल्ड लोन देने की नीति है।

ऋण का कार्यकाल आपके ऋणदाता द्वारा आपकी प्रोफ़ाइल के आधार पर तय किया जाता है।  यह 12 महीने से 30 महीने के बीच हो सकता है।

 बिजनेस क्रेडिट कार्ड

यह तकनीकी रूप से व्यावसायिक ऋण नहीं है। परंतु आप व्यवसाय क्रेडिट कार्ड का उपयोग आपके व्यवसाय के वित्तपोषण के लिए कर सकते हैं।

तुरंत और थोड़े समय के लिये धन की आवश्यकता की पूर्ति के लिए यह बहुत अच्छा विकल्प है।

हालांकि, ब्याज दर पारंपरिक व्यावसायिक ऋणों की तुलना में अधिक हो सकती हैं।

आप इस कार्ड का उपयोग करके व्यवसाय क्रेडिट का निर्माण कर सकते हैं। साथ-साथ की गई खरीदारी पर शानदार पुरस्कार और कैशबैक भी कमा सकते हैं।

आपूर्तिकर्ता क्रेडिट:

ट्रेड क्रेडिट, जिसे आपूर्तिकर्ता क्रेडिट के रूप में भी जाना जाता है। यह प्रदाता द्वारा व्यापारी को दी जाने वाली  क्रेडिट (उधारी) की सुविधा है।

माल का आपूर्तिकर्ता खरीददार को माल उधारी पर देता है तथा बाद में भुगतान करने अनुमति देता है।

 समय पर भुगतान नहीं करने की स्थिति में खरीददार को  सामान खरीदी के लिए आपूर्तिकर्ता को अधिक राशि का भुग तान करना होगा।

फ्लेक्सी लोन:


आपके छोटे व्यवसाय के लिए ₹ 30 लाख तक व्यापार ऋण आपको केवल 24 घंटे के अंदर उपलब्ध है।

आप आपके व्यवसाय की अल्पकालिक ऋण, मध्यवर्ती अवधि के ऋण या दीर्घकालिक ऋण सभी जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

आप इस धन का उपयोग बुनियादी ढांचे में निवेश करने, परिचालन का विस्तार करने, नवीनतम संयंत्र और मशीनरी के उन्नयन, इन्वेंट्री बनाए रखने या कार्यशील पूंजी बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।

इन अनुकूलित ऋणों  के द्वारा आप अपने उद्यम को प्रतिस्पर्धात्मकता और लाभप्रदता के साथ नई ऊंचाइयों पर स्थापित कर  सकते हैं।

ये ऋण आपके छोटे स्तर के व्यवसाय के लिए सही वित्तपोषण समाधान हैं।

फ्लेक्सी लोन सुविधा केवल उतनी ही राशि निकालें जितनी आपको चाहिए।

निधि पूर्व भुगतान शुल्क पर आपके व्यवसाय के नकदी प्रवाह के अनुसार धनराशि का भुगतान करें।

केवल ईएमआई के रूप में ब्याज का भुगतान करें, और टेनर के अंत में मूलधन का भुगतान करें।

ब्याज केवल निकाली गई राशि पर लगाया जाता है, जिससे आप अपनी ईएमआई को 45% तक कम कर सकते हैं। और आपके नकदी प्रवाह में मदद कर सकते हैं।

यह परेशानी मुक्त असुरक्षित व्यापार ऋण 24 घंटे से कम समय में स्वीकृत हो जाता है, आसान पात्रता मानदंड के साथ उपलब्ध है।

इसे केवल 2 दस्तावेजों केआधार पर प्राप्त किया जा सकता है।

ऑनलाइन खाता पहुंच आपको कहीं से भी कभी भी अपने व्यवसाय ऋण विवरण तक पहुंचने की सुविधा है।

 महिला उद्यमियों के लिए बिजनेस लोन:

वर्तमान में सभी बैंक महिला उद्यमियों के लिए काफी आकर्षक ऋण योजनाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

ये योजनाएं उन्हें ₹ 30 लाख तक का वित्त कम ब्याज दरों पर सिक्योरिटी फ्री त्वरित प्रक्रिया द्वारा लोन प्रदान करती हैं।

कुछ बैंकों के पास महिला उद्यमियों के लिए विशेष विभाग भी हैं, जहां वे उन्हें व्यापार/ व्यवसाय सिखाने के लिए ट्रेनिंग भी देते हैं।

महिलाओं की विशेष योजनाओं का लाभ लेने हेतु महिला उद्यमी का फर्म में मालिकाना हक़ 50% से अधिक होना चाहिए।

महिलाओं को बिजनेस लोन देने के लिए विशेष रूप  से प्रचलित कुछ योजनाएं इस प्रकार हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्त्री शक्ती पैकेज, देना बैंक देना स्त्रीशक्ति योजना, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की  सेन्ट  कल्याणी योजना, महिला उद्योग योजनाभारतीय महिला बैंक श्रंगार व अन्नपूणा योजना उघम निधि योजना, महिला समृद्धि योजना, उद्योगिनी योजना आदि।

 बैंक गारंटी:

बैंक गारंटी उद्यमियों और छोटे व्यवसाय के मालिकों को बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली एक ऋण सेवा है।

इसके तहत बैंक उद्यमी के लेनदार को उसकी ओर से वादा करता है कि, अगर उद्यमी अनुबंध दायित्वों को पूरा नहीं करता है, तो बैंक उन देनदारियों को पूरा करेगा।

बैंक द्वारा निम्न दायित्वों की गारंटी ली जाती है:

निष्पादन गारंटी, अग्रिम भुगतान गारंटी, विदेशी बैंक गारंटी, वित्तीय गारंटी,  आस्थगित भुगतान गारंटी, बोली बांड की गारंटी

इसके लिए बैंक द्वारा व्यवसायी से एक किफायती शुल्क लिया जाता है। इसका कार्यकाल गारंटी की आवश्यकता पर निर्भर करता है।

20 – 100% मार्जिन  की आवश्यकता होती है जो उधारकर्ता की प्रोफाइल के आधार तय की जा सकती है।

बिजनेस लोन बैलेंस ट्रांसफर – ऑनलाइन:

बिजनेस लोन बैलेंस ट्रांसफर ऑनलाइन एक क्रेडिट सुविधा है। इसमें ग्राहक अपने मौजूदा बिजनेस लोन को एक बैंक से दूसरे ऑनलाइन ट्रांसफर कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया में बकाया ऋण राशि को एक बैंक से दूसरे बैंक में कम ब्याज दर लगाने के कारण स्थानांतरित कर दी जाती है।

बैलेंस ट्रांसफर करने का मुख्य उद्देश्य ईएमआई को कम करना और बकाया ऋण राशि को कम ब्याज दर पर उधार लेना है।

बिजनेस लोन लेने की तैयारी:

आप बिजनेस लोन लेने का सोच रहे हैं, तो उसके पहले आप उसका पुनर्भुगतान किस तरह करेंगे, इस पर भी विचार अवश्य करना चाहिए।

ऋण लेने के पहले आप यह अवश्य  सुनिश्चित कर लेवें कि आपका व्यवसाय इतनी आय उत्पन्न कर लेगा कि ऋण का भुगतान आराम से किया जा सकेगा।

गैर जिम्मेदाराना उधार, व्यवसाय को असफल भी कर सकता है। इसलिए ऋण लेने के पहले ऋण भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करना ही बुद्धिमानी है।

एक बेहतरीन बिजनेस प्लान तैयार करें। गणना करें कि आपको व्यवसाय में किस विशेष कार्य के लिए बिजनेस लोन की जरूरत है।

कितनी अवधि के लिए जरूरत होगी। ऋण राशि के निवेश पर कुल कितना  व्यय होगा। निवेश उपरांत आपको कितनी आय होगी ।

आपको कितने पैसे की आवश्यकता है। किन भुगतान शर्तों को आप पूरा कर सकते हैं।

आमतौर पर व्यवसायों को विकास के चरण में सबसे अधिक धन की आवश्यकता होती है।

बैंक के साथ अच्छे संबंध बनाएं, खाता खोलें,अच्छी वित्तीय स्थिरता बनाए रखें।

 पुराने खाते या क्रेडिट कार्ड बंद न करें। अपने बिजनेस की लाभप्रदता बढ़ाएं।

आय का सभ्य स्रोत होना चाहिए, अपनी साख में सुधार करें,अपने सिबिल स्कोर  सुधारें।

ऑनलाइन आवेदन समय,प्रयास और खर्चों की बचत करते हैं। आपको निजी ऋणदाताओं के अपेक्षा बैंकों से सस्ता बिजनेस लोन प्राप्त होगा।

सरकारी बैंक एक भौतिक प्रलेखन प्रक्रिया का पालन करते हैं जो समय लेने वाली हो सकती है।

बिजनेस लोन संबंधित शब्दावली एवं तकनीकी जानकारी

बैंक लोन से संबंधित बुनियादी एवं तकनीकी जानकारी का सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त शब्दावली एवं उनका अर्थ ।

सिबिल स्कोरः (CIBIL SCORE)

CIBIL SCORE सिबिल स्कोर (क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड) द्वारा आपके उधारी की रेटिंग है।

आपका यह स्कोर क्रेडिट सूचना रिपोर्ट (सीआईआर) पर खातों और पूछताछ अनुभाग में पाए गए विवरणों का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है।

बेहतरीन क्रेडिट स्कोर आपकी साख का मूल्यांकन करता है। यह आपके क्रेडिट इतिहास पर आधारित होता है।

आपने पहले ऋण लिया है। उसे समय पर चुकाया है।

आप समय पर क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान करते हैं। तो आपके पास एक अच्छा क्रेडिट स्कोर होगा।

ऋण के लिए आवेदन करते समय अच्छा क्रेडिट स्कोर, आपके पक्ष में काम करता है।

आपको कम ब्याज दरों और लचीले कार्यकाल या पुनर्भुगतान शर्तों में ऋण प्राप्त करने में मदद करता है।

ऋणदाता आपके ऋण प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के लिए सबसे पहले आपके सिबिल स्कोर की ही जांच करते हैं।

700 से ऊपर का सिबिल स्कोर एक अनुशासित क्रेडिट / वित्त प्रबंधन को दर्शाता है। एवं उधार देने वाली संस्था का आप पर यकीन बढ़ाता है।

सिबिल स्कोर कम होने पर उधारदाता आपका ऋण आवेदन अस्वीकृत कर सकता है।

ऋण दाता द्वारा उच्च ब्याज दर, की अथवा अतिरिक्त संपार्श्विक जमा करने की पेशकश की जा सकती है।
अधिक मार्जिन मनी की मांग भी की जा सकती है।

संपार्श्विक: (Collateral)

संपार्श्विक एक सुरक्षा है, जो ऋणदाता को ऋण देने का साहस प्रदान करती है। ऋणदाताओं की जोखिम को कम करता है।

संपार्श्विक यानि एक ऐसी संपत्ति जो  ऋण लेने के लिए ऋण दाता को संदर्भित की जाती है।

इसे ऋणदाता ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में स्वीकार करता है।

ऋण के उद्देश्य के आधार पर, संपार्श्विक अचल संपत्ति या अन्य प्रकार की संपत्ति हो सकती है।

यदि कोई उधारकर्ता ऋण को चुकाने में चूक करता है, तो ऋणदाता संपार्श्विक को जब्त कर सकता है।

उसे अपने नुकसानों की भरपाई करने के लिए बेच भी सकता है।

अन्य व्यक्तिगत परिसंपत्तियां, जैसे कि रियल एस्टेट, उपकरण, मशीनरी, जमा या घर की इक्विटी बचत या निवेश खाता, का उपयोग संपार्श्विक व्यक्तिगत ऋण को सुरक्षित करने के लिए किया जा सकता है।

संपार्श्विक का मूल्य जितना अधिक होगा, उतना अधिक आपको लाभ होगा।

मासिक टर्नओवर:

मासिक टर्नओवर से आशय आपके एक माह के कुल व्यवसाय से है।

आपकी बिजनेस लोन प्राप्त करने की पात्रता आपके व्यवसाय के मासिक टर्नओवर के आधार पर निर्धारित की जाती है।

मासिक टर्नओवर से ही पता लगाया जाता है कि आपका व्यवसाय फायदे में है या हानि हो रही है।

व्यवसाय ऋण आवेदन करते समय आपकी आय मुनाफा एवं साख का अध्ययन किया जाता है।

इसी के आधार पर ऋणदाता ऋण राशि की मात्रा  एवं चुकौती की शर्तें तय करते हैं।

अतः आप यह प्रयत्न करें कि टर्नओवर में सदैव निरंतरता बनी रहे।

मार्जिन मनी: (Margin Money)

मार्जिन मनी वह राशि जो उधारकर्ता (स्वामी प्रवर्तक) का अंशदान है। जिसकी गणना कुल परियोजना लागत के प्रतिशत के रूप में की जाती है।

बैंक और वित्तीय संस्थान आपके व्यवसाय ऋण की जरूरतों का 100% वित्त नहीं करते।

ऋणदाता आपकी बिजनेस लोन की डिमांड का केवल 70 से 90 प्रतिशत तक वित्त प्रदान करना पसंद करते हैं।

वे चाहते हैं परियोजना लागत का शेष 10 से 30 प्रतिशत उधारकर्ता मार्जिन मनी के रूप में अपने पास से लगाएं।

इसलिए लोन लेने के पहले आपको ऐसे वित्तीय संस्थान की तलाश करना चाहिए जो आपसे कम से कम मार्जिन की राशि पर ऋण देने के लिए तैयार हैं ।

ब्याज:

उधार ली गई राशि (मूलधन) पर धन के स्वामी को देय शुल्क की राशि को ब्याज कहते हैं।

जिसे उधारकर्ता को मूलधन के अलावा ऋणदाता को भुगतान करना होता है।

 ब्याज दर:  

ऋण की राशि उधार लेने पर उसके लिए दिया जाने वाला प्रतिशत शुल्क को ही ब्याज दर कहते हैं।

ब्याज की गणना करने की विधियां इस प्रकार हैं।

 फिक्स्ड या निश्चित ब्याज दर:

फिक्स्ड या निश्चित ब्याज दरों में, आपको ऋण के पूरे कार्यकाल में समान किश्तों में एक निश्चित प्रतिशत पर ऋण चुकाना होता है।

निश्चित ब्याज दर का लाभ यह है कि बाजार की वित्तीय स्थितियों या रुझानों में उतार-चढ़ाव या बदलाव होने पर भी यह नहीं बदलती है।

बड़ा दोष यह है कि ऋण की अवधि के दौरान ब्याज दर चक्र नीचे चले जाने के बावजूद भी आपको कम ब्याज दरों का लाभ नहीं दिया जाता।

क्योंकि निर्धारित शर्तों अनुसार बैंक आपको दी जा रही ऋण पर सेवा निर्धारित ब्याज दर को नहीं बदलेंगे।

यदि ब्याज दर चक्र अगले कुछ वर्षों तक बढ़ता है, तो यह आपके ऋण पर एक निश्चित ब्याज दर को लॉक करने की सिफारिश करता है।

इसलिए निश्चित ब्याज ऋण के लिए आवेदन करते समय नियमों और शर्तों को अच्छे से पढें।

कुछ बैंक कुछ वर्षों के बाद ब्याज दरों पर पुनः निर्णय लेने या फिक्स्ड ब्याज दर ऋण को फ्लोटिंग ब्याज दर ऋण योजना में बदलने का प्रावधान रख लेते हैं।

फ्लोटिंग ब्याज दर:

ब्याज दर जो अस्थिर है और बाजार के परिदृश्य के अनुसार बदलती रहती है। इन्हें फ्लोटिंग ब्याज दर कहा जाता है।

वर्तमान में यह फंड-आधारित उधार दर की सीमांत लागत से बंधा है।

इसलिए, यदि एमसीएलआर में बदलाव होता है, तो फ्लोटिंग दर में भी उतार-चढ़ाव होता है।

फ्लोटिंग रेट लोन का मुख्य लाभ यह है कि वे तय ब्याज दरों की तुलना में लगभग 1-2% स सस्ते होते हैं।

फ्लोटिंग ब्याज दर की बड़ी कमी ऋण अवधि के दौरान मासिक किस्तों का असमान होना है।  जिससे वित्तीय योजना कठिन हो जाती है।

घटते बैलेंस क्रम वाली रीति

घटते बैलेंस वाली रीति में ब्याज की गणना शेष ऋण राशि पर की जाती है।

यदि आप इस प्रकार का विकल्प चुनते हैं, तो इस विकल्प में ईएमआई की राशि में ब्याज भी शामिल होता है।

जो मूल की चुकौती के साथ प्रत्येक महीने के लिए बकाया ऋण राशि के लिए देय होता है।

इस विधि में अच्छी बात यह है कि प्रत्येक ईएमआई के भुगतान के बाद, ऋण की बकाया राशि कम हो जाती है।

इसलिए, बाद के महीने के लिए ब्याज दर केवल बकाया राशि पर लागू ब्याज की गणना होगी।

 ब्याज दरों को प्रभावित करने वाले घटक:

व्यवसाय की प्रकृति:

ऋणदाता आमतौर पर बिजनेस लोन को व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्र और गैर-प्राथमिकता क्षेत्र के आधार पर ऋण को वर्गीकृत करते हैं।

प्राथमिकता क्षेत्र के ऋणों की तुलना में गैर-प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऋणों की ब्याज दर अधिक होती है।

इसलिए, आपके व्यवसाय की प्रकृति आपके बिजनेस लोन पर ब्याज दर निर्धारित करने हेतु महत्वपूर्ण घटक है।

  व्यापार का अस्तित्व:

आपके व्यवसाय का अस्तित्व जितना अधिक पुराना होगा, उतना ही वह आपके लिए बेहतर है।

आप विगत कुछ वर्षों से सफलता पूर्वक व्यवसाय चला रहे हैं, तो आप आसानी से व्यवसाय ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

क्योंकि ऋण दाता आप पर भरोसा कर सकते हैं कि आप अपने व्यवसाय को ठीक से चला सकते हैं।

प्रतिस्पर्धा में मुकाबला कर सकते हैं। आप ऋण चुकाने की क्षमता रखते हैं

आपका व्यवसाय जितने अधिक वर्षों से संचालित होगा उतनी अधिक संभावना बढ जाती है कि आपको कम ब्याज दर ऋण मिल सकता है।

ऋणदाता का प्रकार:

प्रत्येक ऋण दाता की बिजनेस लोन की ब्याज दरें एक ऋणदाता से दूसरे में भिन्न होती हैं।

आप बैंकों और एनबीएफसी द्वारा पेश किए गए बिजनेस लोन की ब्याज दरों की तुलना करने सकते हैं। आमतौर पर, एनबीएफसी की तुलना में बैंकों की ब्याज दरें कम होती हैं।

ईएमआई (EMI)

ईएमआई (इक्वल मंथली इंस्टालमेंट ) का अर्थ समान मासिक किस्त से है। इसे आपको ऋणदाता को मासिक ऋण की वापसी के लिए भुगतान करना है।

इएमआई ऋण लेते समय स्वीकृत नियम एवं शर्तों के अनुसार निर्धारित की गई मूलधन की राशि और अर्जित ब्याज के आधार पर तय की जाती है।

 ईएमआइ राशि को प्रभावित करने वाले घटक:

1. ब्याज की दर:

ब्याज की दर बहुत महत्वपूर्ण है

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच ब्याज दर में हमेशा
प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।

अधिक से अधिक उधारकर्ता ऋण लेने हेतु बैंक में आएं इसलिए ब्याज दर कम रखी जाती है।

सभी संस्थानों से सभी संभावित ब्याज दरों का पता लगाएं।  उचित शोध के बाद उस दर को चुनें जो आपकी ऋण राशि के लिए सर्वोत्तम है।

याद रखें, ब्याज की दर अधिक होगी, आपकी ईएमआई भी अधिक होगी और ब्याज की दर कम होगी तो आपकी ईएमआई भी कम होगी।

  2. ऋण अवधि:

लंबे समय तक ऋण का कार्यकाल होने से आपकी इएसआइ तो कम होगी परन्तु ब्याज भी अधिक लगेगा
ऋण अवधि और ब्याज दर के सभी संभावित संयोजनों को देखें।

3. ऋण राशि:

आप जितना अधिक ऋण लेंगे उतनी आपकी ईएमआई राशि उतनी ही अधिक होगी।

इसी तरह जितना कम ऋण लेंगे उतनी ईएमआई कम होगी।

ग्यारंटर:

गारंटर वह व्यक्ति है जो उधारकर्ता को ऋण प्राप्त करने में मदद करता है।

वह उधारकर्ता के ऋण चुकाने में असमर्थ होने की स्थिति में ऋणदाता को ऋण चुकता करने का वादा करता है।

गारंटर होने का मतलब उधारकर्ता के ऋण ना चुकाने की स्थिति में उसके बकाया ऋण का भुगतान करने की जिम्मेदारी लेना।

इसलिए जिसे आप अच्छी तरह  से जानते हैं,  केवल उसी का गारंटर होने के लिए सहमत होना चाहिए।

एपीआर: (Annual percentage rate)

एनुअल परसेंटेज रेट वार्षिक प्रतिशत की दर  (सालाना फीसदी दर ) एक वर्ष की उधारकर्ता की ऋण की कुल, लागत सेवा शुल्क सहित।

एडजस्टेबल रेट:

यह दर एक ऋण भुगतान पर जोड़ी गई ब्याज की राशि है जो वर्तमान बाजार में उतार-चढ़ाव के आधार पर समायोजित होती है।

परिशोधनः Amortization

एक निर्दिष्ट अवधि में, यह नियमित भुगतान के माध्यम से प्राप्त ऋण का क्रमिक उन्मूलन है (मूलधन और ब्याज दोनों को कवर करने के लिए पर्याप्त)।

नकारात्मक परिशोधन: Negative Amortization.

यह बंधक ऋण में धीरे-धीरे वृद्धि कि स्थिति है। मासिक ऋण भुगतान की विफलता के कारण शेष राशि लगातार बढ़ती जाती है। ब्याज को पर्याप्त रूप से कवर करने के लिए बनती है।

विलम्ब: Default

ऋण भुगतान के संदर्भ में उधारकर्ता द्वारा समय पर भुगतान नहीं किए जाने या देर से किए किया जाता है।

बहुत पहले छूटे हुए भुगतान  वाली स्थिति को डिफ़ॉल्ट / विलंबित स्थिति  कहते हैं।

निर्धारित दर:

यह एक निश्चित भुगतान राशि है जो ऋण के भुगतान पर जोड़ी जाती है जो ऋण के जीवन पर समान रहती है।

सूचकांक:  Index

एक इंडेक्स समायोज्य दर बंधक के लिए ब्याज दर में उतार-चढ़ाव की समय सारिणी है।

 लाइफ कैप:

यह वह सीमा है जहां भुगतान दर ऋण के जीवन पर बदली जा सकती है।

सही बिजनेस लोन का चयन करना:

अपनी आवश्यकतानुसार बिजनेस लोन प्राप्त करने हेतु  बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा उपलब्ध सुविधाओं को जानने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करें।

इन बिंदुओं पर स्वयं संतुष्टि प्राप्त कर लें

बैंक कितना विश्वसनीय है।
न्यूनतम आवश्यकता और मानदंड क्या हैं ?
ब्याज की गणना किस विधि से की जावेगी ?
प्रसंस्करण शुल्क और अन्य शुल्क का विवरण?
ईएमआई, क्या होगी?
क्या संपार्श्विक की आवश्यकता है या नहीं ?

एक सर्वोत्तम विकल्प का चयन करें।

जिसमें कम ब्याज दर हो।
ऋण चुकाने की अवधि अधिकतम हो।
कम प्रसंस्करण शुल्क हो।
कोई अन्य छिपे शुल्क ना हों।

उद्यम पूंजीपतियों की तुलना में बैंक अधिक स्वीकार्य हैं।
एंजेल निवेशक और उद्यम पूंजीपति व्यवसाय पर आंशिक स्वामित्व एवं व्यवसाय के मुनाफे को साझा करने की शर्तों के साथ ऋण देने के लिए सहमत  होते हैं।

आपको यह मालूम रहना चाहिए कि आप किस तरह के ऋण के लिए आवेदन कर रहे हैं।

अल्पावधि के बजाय दीर्घकालिक व्यापार ऋण के लिए आवेदन करें।

यदि आप को इन सबका ज्ञान नहीं है तो आपके लिए  किसी योग्य सलाहकार की मदद लेना अच्छा रहेगा।

1.   ऋण की मात्रा:

विभिन्न वित्तीय संस्थानों की व्यवसाय ऋण राशि की   पेशकश करने की अपनी अलग-अलग सीमाएं होती हैं।

ऋण लेने के लिए बैंक का चयन करने के पहले आपको  यह पता होना चाहिए कि आपको किन व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कितने धन की आवश्यकता है।

बढ़िया व्यवसाय प्रदर्शन, बेहतरीन सिबिल स्कोर, तथा पुनर्भुगतान क्षमता आपको अनुकूल ब्याज दर के लिए मोलभाव करने में सक्षम बनाती है।

2.  ब्याज और कार्यकाल की दर:

ब्याज दर और ऋण अवधि कार्यकाल आपके द्वारा चुकाने वाली राशि को सीधे प्रभावित करते हैं।

जितनी  ब्याज दर अधिक होगी उतनी ही अधिक आपके बिजनेस लोन की ईएमआई होगी।

ऋण अवधि जितनी कम होगी इएमआई उतनी अधिक होगी।

आपको ऋणदाता संस्थान  के साथ ब्याज दर पर अवश्य बात करना चाहिए।

3. प्रोसेसिंग चार्ज और अन्य शुल्क:

बैंक और वित्तीय संस्थान व्यवसाय ऋण पर प्रसंस्करण शुल्क लगाते हैं जो  स्वीकृत राशि के जो 2% से लेकर 6% तक होता है।

इसके अलावा, बैंकों द्वारा फ्रंट-क्लोजर शुल्क और नवीकरण शुल्क के बारे में  भी जानना होगा।

यह प्रयास करें कि कम से कम प्रसंस्करण एवं अन्य शुल्क पर अधिक तम बिजनेस लोन प्राप्त हो सके।

आपको ऋण पर कितना ब्याज देना है।
ऋण की मूल राशि कितनी है।
वह अवधि जिसमें ब्याज सहित ऋण चुकाया जाना है।
ऋण पर ब्याज की दर क्या होगी।
अन्य प्रोसेसिंग शुल्क क्या हैं
आपकी ऋण भुगतान की मासिक किस्त कितनी बनेगी

 बिजनेस लोन प्राप्ती हेतु आवेदन (ऑनलाइन / ऑफलाइन ) का तरीकाः

बिजनेस लोन लगभग सभी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाते हैं। आप बिजनेस लोन के लिए आसानी से  आवेदन कर सकते हैं।

1.  ऋण के लिए आवेदन करनाः

बैंक या ऋणदाता की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं, उस ऋण की खोज करें जो आपके व्यवसाय की जरूरत को पूरा करता हो।

वह खोजें जो आपके व्यवसाय की आवश्यकताओं के  अनुरूप हो और फिर व्यवसाय ऋण के लिए आवेदन करें।

ऑनलाइन आवेदन हेतु, अपनी उपरोक्तानुसार पसंदीदा वेबसाइट पर जाएं। वहां पर अपने बारे में तथा व्यवसाय के बारे में बुनियादी जानकारी भरनी होगी।

ऑफ़लाइन आवेदन के लिए, आपको बिजनेस लोन आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए वांछित ऋण दाता के निकटतम शाखा कार्यालय में जाना होगा।

2.  दस्तावेज़ प्रस्तुत करनाः

आपकी बिजनेस लोन पात्रता जानने के बाद, अपने जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करें। सबमिट बटन दबाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें।

ऑफ़लाइन आवेदन के लिए, आपको ऋण आवेदन के साथ सभी दस्तावेजों को संलग्न करना होगा और शाखा में जमा करना होगा।

3. बिजनेस लोन प्रसंस्करण:

बैंक द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने पर आपके बिजनेस लोन आवेदन का प्रसंस्करण प्रारंभ किया जाता है।

जिसमें आपके बिजनेस लोन लेने का उद्देश्य, आपकी नगद प्रवाह क्षमता, एवं सिबिल स्कोर की जांच शामिल है।
इसके अलावा एक व्यक्तिगत चर्चा, अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता या आपके व्यवसाय के स्थान और निवास की एक विजिट भी की जा सकती है।

4. ऋण स्वीकृति सूचना:

बैंक अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों एवं अन्य सूचनाओं से पूर्णतया संतुष्ट होने पर आपका बिजनेस लोन स्वीकृत हो जाता है तथा आपको सूचित कर दिया जाता है।

यह सूचना आनलाइन आफलाइन दोनों तरह की जा सकती है।

पोस्ट-अनुमोदन, ऋण स्वीकृत होने पर आपको ऋण समझौतों को निष्पादित करने और बिजनेस लोन की शर्तों पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है।

 बिजनेस लोन प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थान

आप अपने व्यवसाय के लिए पूंजी की तलाश कर रहे हैं, तो वर्तमान में ऋणदाता चुनने के लिए कई विकल्प हैं।

बिजनेस लोन सभी बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों, जिन्हें नान बैंकिंग फायनेंस कंपनी (एनबीएफसी) भी कहते हैं, के द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं।

इन दिनों एन्जिल निवेशक एवं उद्यम पूंजीपति वेंचर कैपिटलिस्ट भी धन मुहैया कराते हैं।

एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सिटी बैंक, एक्सिस बैंक, फुलर्टन इंडिया, टाटा कैपिटल, IIFL आयआयएफएल, स्टेट बैंक आफ इंडिया बजाज फिनसर्व, लेंडिंगकार्ट, आदि।

बिजनेस लोन आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज:

व्यवसाय ऋण का लाभ उठाने के लिए आपको निम्न दस्तावेज तैयार रखने होंगे।

1.  व्यवसाय पहचान दस्तावेजः

दस्तावेजों में पैन कार्ड, व्यवसाय का जीएसटी नंबर और संविधान के दस्तावेज शामिल हैं –

एकमात्र स्वामित्व और व्यक्तियों के लिए – ट्रेड लाइसेंस

पार्टनरशिप फर्म के लिए – पार्टनर शिप डीड

कंपनियों के लिए – एसोसिएशन और एसोसिएशन ऑफ एसोसिएशन और एक व्यापार ऋण प्राप्त करने के लिए बोर्ड संकल्प के ज्ञापन।

 2.  प्रोपराइटर, प्रोफेशनल, पार्टनर या डायरेक्टर्स के केवाईसी दस्तावेजः

पहचान दस्तावेजों में निम्नलिखित दस्तावेजों में से किसी की एक प्रति शामिल होगी।

आधार कार्ड,  पैन कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस,

एड्रेस प्रूफ दस्तावेजों में कॉपी शामिल है

बिजली का बिल, पासपोर्ट, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, नगर निगम संपत्ति कर रसीद,

3. व्यवसाय ऋण संबंधित दस्तावेजः

ऋण से संबंधित दस्तावेज शामिल होंगे

आय दिखाने वाले व्यवसाय के नवीनतम आईटी रिटर्न,
बैलेंस शीट, लाभ और हानि खाता, पिछले 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट।

उपकरण, कार्यालय अंतरिक्ष, फर्नीचर और मशीनरी खरीद के संबंध में चालान / कोटेशन।

अंतिम सूचनाः

 यह लेख कुछ ज्यादा बड़ा हो रहा है, इसलिये इसे यहींं  विराम देते हैं।

यदि आपके कुछ डाउट्स हैं तो कमेंट्स कर अवश्य पूछें।मित्रों के साथ शेयर अवश्य करें।

अगले लेख मेंं  हम सरकारी ऋण और सहायता के संबंध में विस्तार से बताने वाले हैं।

यदि आप किसी अन्य विषय पर जानकारी चाहते हैं तो कमेंट्स द्वारा सूचित करें।

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