बिजनेस कैसे शुरू करें ? स्टेप बाय स्टेप गाइड

बिजनेस कैसे शुरू करें


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“बिजनेस कैसे शुरू करें” स्टेप बाय स्टेप गाइड

यदि आप अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं? तो आप सही जगह पर पर हैं। यह लेख “बिजनेस कैसे शुरू करें” स्टेप बाय स्टेप गाइड आपकी बहुत मदद करेगा।

आज मैं आपको अपना खुद का “बिजनेस कैसे शुरू करें” इससे संबंधित बुनियादी एवं जरूरी बातों को विस्तार से बताने वाला हूँ।

बिजनेस शुरू करना एक बहु-चरण प्रक्रिया है। इसकी मदद से आप सुव्यवस्थित ढ़ंग से अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

बिजनेस को कई नामों से जाना जाता हैं। जैसे व्यावसाय, उद्यम, कारोबार, कामधंधा, पेशा, कामकाज, व्यापार आदि।

भले ही, ये सभी शब्द आपको भिन्न-भिन्न दिख रहे हों, परंतु इन सबका एक ही अर्थ है। अपना खुद का काम करना।

यह काम छोटे या बड़े किसी भी स्तर पर शुरू किया जा सकता है। कहने का आशय यह है कि आप फुटपाथ पर अकेले बैठकर भी बिजनेस कर सकते हैं।

या फिर, अंबानी बिडला टाटा जैसे हजारों लाखों वर्कर्स रखकर भी बिजनेस कर सकते हैं।

जानिए: ई-कामर्स व्यापार क्या है?

प्रायः ऐसा देखने में आया है कि बहुत से लोग अपने आसपास के व्यवसायियों के रहन सहन से प्रभावित होकर, अपना बिजनेस करने का मन बना लेते हैं।

तथा बिना किसी विजन और मिशन के शीघ्रता में कोई भी बिजनेस शुरु कर लेते हैं। लेकिन उसे सफलता पूर्वक चला नहीं पाते हैं ।

नतीजा नुकसान तो उठाते ही हैं। समय, श्रम और धन भी बरबाद होता है।

मेरा उद्देश्य आपको यह बताकर निरुत्साहित करना या डराना बिल्कुल भी नहीं है। मैं केवल आपको सावधान कर रहा हूँ।

आप बिजनेस करना चाहते हैं? तो आपको अपने विजन और मिशन दोनों स्पष्ट होने चाहिए।

आप बिजनेस क्यों करना चाहते हैं? क्या प्राप्त करना चाहते हैं? कब तक प्राप्त कर लेंगे? आपका अंतिम लक्ष्य क्या होगा? ये सब स्पष्ट रहना चाहिए।

बिजनेस शुरू करने के लिए आपके पास समय, साहस, धीरज के साथ पक्का इरादा और कड़ी मेहनत करने की क्षमता भी होना चाहिए।

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प्रिय पाठक,
यदि आप हमारे ब्लॉग में पहली बार आए हैं तो आपके लिए एक जरूरी सूचना है। हमारे लेख बड़े अवश्य होते हैं।

परन्तु हम अनावश्यक या एक ही चीज को बार बार दुहराते हुए लेख को बड़ा करने की कोशिश कभी नहीं करते हैं।

हम कम से कम शब्दों से अधिक सारगर्भित सामग्री को आप तक पंहुचाते हैं। इन्हें हम बहुत मेहनत से रिसर्च कर तैयार करते हैं।

हमारी कोशिश यही है कि आप कहीं भ्रमित (कन्फ्यूज) ना हो पाएं। सभी संबंधित एवं सटीक जानकारी आपको एक ही स्थान पर मिल जावे।

इसलिये ” बिजनेस कैसे शुरू करें स्टेप बाय स्टेप गाइड”  इस लेख को ध्यानपूर्वक पूरा अवश्य पढ़ें।

आप चाहें तो इसे दो या तीन पार्ट में भी पढ़ सकते हैं। इसके लिए इसे बुकमार्क करके भी रख सकते हैं।

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सोशल मीडिया पर हमें फालो भी कर सकते हैं।  आइए समझते हैं “बिजनेस कैसे शुरू करें स्टेप बाय स्टेप गाइड “

यदि आप अपना कोई कामधंधा शुरु करना चाहते हैं, तो सबसे पहले, उससे संबंधित सारा होमवर्क अच्छी तरह से पूरा कर लेवें।

अब तो बिजनेस करना और भी सरल हो गया है। सरकार भी इसे शुरू करने के लिए हर तरह से मदद कर रही है।

छोटे से बड़े स्तर पर सभी को ऋण, प्रशिक्षण एवं अन्य ढ़ेर सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। आप भी इनका फायदा ले सकते हैं।

आज आप जो बड़े बड़े बिजनेस देख रहे हैं, ये सभी एक छोटे से आइडिया से ही शुरू हुए हैं।

केवल दूरदर्शी और आत्मविश्वासी लोग ही अपने सपने सच कर सकते हैं।

बिजनेस में सफलता प्राप्त करने के लिए एक अच्छा बिजनेस आयडिया होना जरुरी होता है।

इसके द्वारा आप खुद के पास उपलब्ध संसाधनो और समय का सही प्रबंधन कर अपने व्यवसायिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

चलो चरण दर चरण इसे समझते हैं। “बिजनेस कैसे शुरू करें”  प्रथम चरण मे

एक अच्छा सा बिजनेस आयडिया चुनें

बिजनेस करने का मन बना लेने के बाद आपको यह निर्णय लेना चाहिए कि आप किस तरह का बिजनेस, किस स्तर पर करना पसंद करेंगे।

बिजनेस तीन तरह से किया जा सकता है।

1) मर्केंटाइल बिजनेस (व्यापार करना)
2) सर्विस बिजनेस (सेवा व्यवसाय)
3) मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस (निर्माण उद्योग)
1) मर्केंटाइल बिजनेस (Trading)

मर्केंटाइल बिजनेस में उत्पाद एवं सेवा को खरीदने बेचने का काम किया जाता है।

इसके अंतर्गत आप रिटेलर, (खुदरा व्यापारी) होलसेलर, (थोक व्यापारी) डिस्ट्रीब्युटर (वितरक) के रूप में व्यापार कर सकते हैं।

उदाहरण फल, सब्जी, किराना बेचना, अनाज कपड़ा बेचना ,सोना चांदी बेचना आदि।

इस बिजनेस को आप आफलाईन एवं आनलाईन भी कर सकते हैं।

2) सर्विस बिजनेस (Service)

सेवा व्यवसाय के अंतर्गत आपको किसी विषय या हुनर में निपुणता प्राप्त करना है।

अपने समय एवं हुनर को जरूरत मंद लोगों को शुल्क लेकर उन्हें प्रदान करना है। इसे ही सेवा व्यवसाय कहते हैं।

उदा ब्यूटी पार्लर कंसल्टेंट पेशेवर इवेंट आर्गेनाइजर, आईटी, मार्केटिंग आदि काम, या रेस्तौरेंट, भोजनालय, कियोस्क, ट्रांसपोर्टेशन, सैलून, स्पा आदि ।

3) मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन)बिजनेस (Manufacturing)

इसके अंतर्गत आपको कच्चे माल को मानवीय श्रम एवं मशीनों की सहायता से और अधिक उपयोगी उत्पाद बनाना है।

उसे बाजार में प्रदाय करना है। इसे ही उत्पादन मैन्युफैक्चरिंग ( विनिर्माण) व्यावसाय कहते हैं।
जैसे साबुन बनाना। एसी, फ्रिज, कार बनाना।

आप चाहें तो मैन्युफैक्चरिंग मर्केंटाइल दोनों का मिश्रित बिजनेस भी कर सकते हैं।

बिजनेस आयडिया स्थान विशेष की भौगोलिक स्थिति, वहां रहनेवाले लोगों के रहन सहन तथा उनकी क्रय शक्ति अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

ऐसे बिजनेस जो लोगों की समस्याएं हल करने वाले हैं या सेवा से जुड़े हैं, वो सभी बहुत जल्दी विकसित हो जाते हैं।

इसलिए अपने क्षेत्र में या जहां आप काम करना चाहते हैं, उन इलाकों में हो रही समस्याओं पर ध्यान दें।

आपको ऐसे कई बिजनेस आयडिया मिल जाएंगे, जो उन समस्याओं को हल कर सकते हैं।

अब आप यह तय करें कि उनमें से आप कौनसा बिज़नेस कर सकते हैं? किसी उत्पाद का विक्रय कर सकते हैं?

क्या आप कोई उत्पाद बना सकते हैं? या फिर, कोई सेवा व्यवसाय करना पसंद करेंगे?

इनमें से अपनी पसंद का बिजनेस आयडिया अपनी योग्यता और क्षमता अनुसार फायनल कर लेवें।

बिजनेस आयडिया पर अधिक जानकारी के लिए हमारा लेख  एक अच्छा बिजनेस आयडिया कैसे चुनें जरूर पढ़ें। 


अपने बिजनेस आयडिया का निर्णय लेने के बाद आपके “बिजनेस कैसे शुरू करें ” गाइड का अगला चरण होगा मार्केट रिसर्च (बाजार सर्वेक्षण) करना।

 मार्केट रिसर्च (बाजार सर्वेक्षण) करना।

मार्केट रिसर्च के द्वारा आप जो भी बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, उससे संबंधित सभी जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं।

आप इसे ऑनलाइन ऑफलाइन या दोनों तरह से भी कर सकते हैं।

इस एकत्रित जानकारी की मदद से आप अपने बिजनेस के लिए मजबूत रणनीति एवं बढ़िया व्यावसायिक योजना बना सकते हैं।

बिजनेस में सफल होने के लिए आपको अपने ग्राहकों को जानना भी बहुत जरूरी होता है। ग्राहक ही हमारे बिजनेस को आगे बढ़ाते हैं।

बाजार सर्वक्षण के द्वारा आप यह पता लगा सकते हैं कि आपके बिजनेस आयडिया को ग्राहक स्वीकार करेंगे या नहीं ?

कितने लोग आपके उत्पाद अथवा सेवा में रुचि रखते है?

आपके उत्पाद या सेवा को ग्राहक कितना मूल्य देने के लिए तैयार हो सकते हैं?

आपका बिजनेस आयडिया किन लोगों के काम आएगा। मतलब किस आय, वर्ग विशेष, स्थान विशेष के लिए उपयोगी होगा।

इसी के साथ आपके उत्पाद एवं सेवा की बाजार में प्रतिस्पर्धा एवं प्रतिस्पर्धियों की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य के विकास की जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी।

ये सब जानकारी प्राप्त करने के लिए आप अपने उत्पाद या सेवा से संबंधित प्रश्नों की एक सूची तैयार कर सकते हैं।

आपकी सुविधा हेतु संभावित प्रश्नों की सूची दी जा रही है। इसमें आप अपने बिजनेस की प्रकृति और स्वरूप अनुसार कुछ प्रश्न घटा बढ़ा सकते हैं।

बिजनेस की वर्तमान स्थिति क्या है?
बाजार में प्रतिस्पर्धियों की संख्या कितनी है?
प्रतिस्पर्धी किस तरह कार्य कर रहे?
उत्पाद एवं सेवा से संबंधित जानकारी?
उत्पाद या सेवा की मांग एवं पूर्ती की स्थिति कैसी है?
उत्पाद एवं सेवा के लिए अन्य कौनसे विकल्प मौजूद हैं?
उत्पाद एवं सेवा किस मूल्य पर उपलब्ध हैं?
उत्पाद एवं सेवा की भविष्य में क्या मांग होगी?
ग्राहकों की आवश्यकता, क्या है?
ग्राहकों की प्राथमिकता क्या है?
ग्राहकों की क्रयशक्ति कितनी है?
संभावित उपभोक्ताओं की वर्तमान संख्या कितनी है?
भविष्य में यह बढे़गी या कम होगी?

इस एकत्र जानकारी से आप अपने बिजनेस प्लान और अग्रिम रणनीति को और अधिक बेहतर बना सकते हैं।

कैसे आप अपने उत्पादों या सेवाओं को अपने प्रतिस्पर्धियों से बेहतर बना सकते हैं।

आप यह तय कर सकेंगे कि आपको अपने बिजनेस की शुरुआत किस स्तर से करना चाहिए। भविष्य में कितना विस्तार कर सकेंगे।

मार्केट रिसर्च (बाजार सर्वेक्षण) से संबंधित और अधिक जानकारी आप हमारे लेख मार्केट रिसर्च कैसे करें में पढ़ें।


बेहतरीन बिजनेस प्लान बनाएं।

बिजनेस कैसे शुरू करें गाइड के इस चरण में आपको अपने बिजनेस का एक बढ़िया बिजनेस प्लान तैयार करना है।

इसमें आपको अपने बिजनेस से सम्बंधित हर पहलू का विस्तार से वर्णन करना है।

अपना बिजनेस विजन, पूंजी निवेश की मात्रा , व्यवसाय की संरचना, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, उत्पादन, विक्रय, विपणन संबंधी आपकी रणनीती इन सभी को स्पष्ट करना चाहिए।

बिजनेस प्लान में आपको यह भी बताना चाहिए कि किस तरह से आपका बिजनेस व्यवहार्य एवं लाभप्रद है।

इसके लिए बिजनेस के वर्णित लक्ष्यों, वित्तीय अनुमानों के साथ लागत एवं बिक्री की कीमतों, करों, वितरण व्यय के साथ अनुमानित आय की जानकारी भी दर्शाना चाहिए।

आपका बिजनेस प्लान, आपके बिजनेस की मार्गदर्शिका के रूप में काम करेगा।

बिना सुदृढ़ योजना के अच्छे से अच्छा बिजनेस आइडिया भी किसी काम का नहीं रह जाता।

इस बिजनेस प्लान में आपका व्यक्तिगत विवरण नाम, आयु और योग्यता शामिल करना चाहिए। प्रासंगिक अनुभव और प्रमाण पत्र भी संलग्न किए जाने चाहिए।

लिखित बिजनेस प्लान बैंक और अन्य स्त्रोतों से ऋण लेने के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

बिजनेस प्लान (परियोजना प्रतिवेदन) से संबंधित समस्त जानकारी के लिए मेरा लेख परियोजना प्रतिवेदन कैसे बनाएं जरूर पढ़ें।

“बिजनेस कैसे शुरू करें” गाइड का अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है पूंजी की व्यवस्था करना।

बिजनेस के लिए पूंजी निवेश की व्यवस्था करना

किसी भी बिजनेस को शुरू करने के लिए धन की जरुरत होती है। बिजनेस में जो धन लगाया जाता है उसे पूंजी कहते हैं। पूंजी से ही हर काम संभव हैं।

बिजनेस में पूंजी निवेश की जरूरत दो तरह से होती है।

1) स्थाई संपत्ति में निवेश 2) कार्यशील पूंजी में निवेश।

1. स्थाई संपत्ति में निवेश

अपने बिजनेस प्लान अनुसार आपको भूमि, भवन, संयंत्र, मसीनरी, उपकरण, फर्नीचर, अन्वायुक्ति आदि की व्यवस्था करने के लिए धनराशि की आवश्यकता होगी।

2) कार्यशील पूंजी के लिए।

बिजनेस को चलाने के लिए आपको कुछ माह तक दैनंदिन खर्चों के लिए पूंजी की जरूरत होगी। इसे ही कार्यशील पूंजी कहते हैं।

इसमें वेतन, किराया, बिजली, पानी, मेंटेनेंस, परिवहन पर होने वाले सभी व्यय शामिल हैं।

बिजनेस के “ना लाभ ना हानि” (ब्रेक ईवन प्वॉइंट) की स्थिति में पहुंचने तक आपको अपने पास से पैसे खर्च करने होंगे।

बिजनेस प्लान अनुसार आपको अपना बिजनेस शुरू करने के लिए कुल कितने धन की जरूरत होगी इसका सही आकलन करना होगा।

इसके लिए आप स्थाई संपत्ति की खरीदी तथा कार्य शील पूंजी के लिए कुल कितने धन की जरूरत होगी, इसकी एक सूची बना लेवें।

कुल योग में से आपके पास उपलब्ध राशि घटा लेवें। शेष राशि की व्यवस्था आप किस तरह करेंगे, यह भी आपको तय कर लेना चाहिए।

आप अपनी वितीय आवश्यकताएं अपने मित्रों और रिश्तेदारों से उधार या लोन लेकर भी पूरी कर सकते हैं।

आप चाहें तो अपने किसी विश्वास प्राप्त संपन्न एवं होशियार व्यक्ति को भागीदार बनाकर भी अपना काम शुरू कर सकते हैं।

आजकल तो पूंजी प्राप्त करने के नए नए तरीके भी उपलब्ध हैं, जैसे सहकारी साख समितियां, स्व सहायता समूह, एंजेल इन्वेस्टर्स, वेंचर कैपिटल फण्ड, क्राउड-फंडिंग आदि।

यदि आपके पास पर्याप्त फंड नहीं है तो आप बिजनेस लोन के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

सरकार द्वारा स्टार्टअप इंडिया व मुद्रा योजना भी शुरू की गई है। इनके तहत भी आप लोन ले सकते हैं।

आप जहां से भी ऋण लेना चाहते हैं, वहां जल्दी आवेदन कर दें।

इसके लिए आपको अपने बिजनेस की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ आवेदन करना चाहिए।

बिजनेस हेतु पूंजी व्यवस्था से संबंधित अधिक जानकारी के लिए मेरी ब्लॉग पोस्ट बिजनेस हेतु पूंजी की व्यवस्था कैसे करें में पढ़ी जा सकती है।

“बिजनेस कैसे शुरूकरें” गाइड का अगला चरण है बिजनेस के लिए सही स्थान का चुनाव करना।

 बिजनेस हेतु सही स्थान का चुनाव

बिजनेस की सफलता में सही स्थान का चुनाव बहुत महत्व रखता है।

स्थान का चुनाव बिजनेस के आकार प्रकार एवं स्वरूप पर निर्भर करता है।

स्थान का चुनाव सही नहीं होने की स्थिति में सीधा असर लाभ पर होता है।

1) यदि आप केवल आनलाइन मर्केंटाइल बिजनेस कर रहे हैं तो आप इसे अपने घर के किसी कोने से या छोटे से कमरे में बैठे बैठे भी कर सकते हैं।

2) यदि यही बिजनेस आप आफलाइन कर रहे हैं तो इसके लिए आपकी दुकान या शोरुम बीच मार्केट में होना जरूरी है।

मार्केट में उपलब्ध ना हो तो मार्केट के करीब हो। दूर से स्पष्ट दिखाई देती हो। ग्राहक आसानी से पहुंच सकें ऐसी जगह होना चाहिए।

आप आपके उत्पाद अथवा सेवा के ग्राहक जिस क्षेत्र में सबसे अधिक हैं उस स्थान का भी चयन कर सकते हैं।

3) यदि आपका मेन्युफेक्चरिंग बिजनेस है तो आपको स्थान के चुनाव पर विषेश ध्यान देना होगा।

कारखाना और कार्यालय अलग अलग स्थानों पर भी लिए जा सकते हैं।

उत्पाद एवं सेवा के निर्माण के लिए स्थान का चुनाव करते समय निम्न मुद्दों पर विशेष ध्यान रखें।

भौगोलिक स्थिति कैसी है।
स्थान का बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे रोड, कम्युनिकेशन की सुविधा किस प्रकार की है।

कानून एवं कर व्यवस्था संबंधी सरकार नीति क्या है।कम पैसे में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हो सकता हो।

जमीन, फ़ैक्ट्री या ऑफिस के लिए किराये की दरें कम हों।

कच्चे माल की उपलब्धता। बिजली इंधन और फ़्यूल की उपलब्धता एवं दरें।

स्थानीय सरकार द्वारा दिए जाने वाले इंसेंटिव
परिवहन व्यवस्था आदि।

आपका व्यापार किसी मार्केट में है, तो आपको जल्दी सफलता मिलेगी। यदि आप मार्केट से दूरी पर है, तो आपको लाभ कम हो सकता है।

यदि आपका उत्पादन स्थल भी मार्केट के पास है तो तैयार माल पर परिवहन व्यय कम लगेगा।

यदि आपका बिजनेस स्थल किराए पर लिया जाना है तो भावताव करके किराया कम भी कराया जा सकता है।

बिजनेस हेतु स्थान चयन की विस्तार से जानकारी के लिए लेख “बिजनेस हेतु उपयुक्त स्थान चयन कैसे करें” में पढ़िए

अपने बिजनेस की संरचना का स्वरुप निर्धारित करना।

“बिजनेस कैसे शुरू करें” गाइड केइस चरण में आपको अपने बिजनेस की संरचना के स्वरूप को निर्धारित करना है। यह अत्यधिक महत्वपूर्ण और जरूरी कार्य है।

संरचना के आधार पर ही बिजनेस की संपूर्ण गतिविधियों का संचालन निर्भर रहता है।

बिजनेस की संरचना के प्रावधान ही आपकी संवैधानिक औपचारिकताएं, व्यक्तिगत देयताएं, कराधान पद्धति, आदि तय करते हैं।

इसलिए, इसका निर्णय आपको खुद की पूंजी निवेश क्षमता, जोखिम उठाने की ताकत, संचालन एवं नियंत्रण की योग्यता, उपलब्ध संसाधनों एवं टीम को ध्यान में रखते हुए ही लेना चाहिए।

बिजनेस संरचना के प्रारुप का निर्णय आपको उसके भावी विस्तार की संभावनाओं पर विचार करते हुए लेना चाहिए।

आपको संस्थान के स्वामित्व के स्वरूप का निर्णय उससे होने वाले लाभ-हानि का आकलन करके ही लेना चाहिए।

एक छोटा बिजनेस संस्थान प्रोप्राइटरशिप, पार्टनरशिप, ओपीसी, एलएलपी, और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत कराया जा सकता है। इनकी जानकारी इस प्रकार है।

एकल स्वामित्व (Sole Proprietor)

एकल स्वामित्व यह बिजनेस संरचना का एक ऐसा प्रारुप है, जो किसी एक व्यक्ति के द्वारा स्थापित किया जाता है।

वही व्यक्ति बिजनेस में पूंजी लगाता है। वही बिजनेस को संचालित एवं नियंत्रित करता है। तथा बिजनेस से होने वाले समस्त लाभ हानि को वहन भी करता है।

इस संरचना में उसका दायित्व असीमित होता है। एकल स्वामित्व व्यवसाय एक अलग कानूनी इकाई नहीं है।

व्यवसाय के मालिक से उसका अलग कोई अस्तित्व नहीं होता है।

 साझेदारी (Partnership)

बिजनेस की इस संरचना में दो या दो से अधिक व्यक्ति, मिलकर आपसी सहमति के आधार पर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

इसमें सभी भागीदारों के बीच एक लिखित समझौता किया जाता है। जिसे भीगीदारी विलेख (पार्टनरशिप डीड) कहते हैं।

यह भागीदारी अधिनियम के अंतर्गत बनाया एवं पंजीकृत कराया जाता है।

इसमें सभी भागीदारों के नाम तथा पतों के साथ उनके कर्तव्य एवं दायित्व के विवरण भी लिखे जाते हैं।

इस डीड में अन्य सभी जानकारियां सम्मिलित की जाती हैं। प्रत्येक भागीदार कितनी पूंजी लगाएगा।

कौन-कौन किस-किस तरह काम करेंगे। तथा लाभ-हानि का बंटवारा आपस में किस तरह किया जावेगा।

सभी भागीदारों का दायित्व असीमित होता है।

भागीदारी समझौते के अनुसार भागीदारों की व्यक्तिगत संपत्तियों से ऋण वसूल किए जा सकते हैं।

उपरोक्तानुसार दोनों संरचनाओं में असीमित दायित्व से निवेशकों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा दो नए प्रारूप प्रारंभ किए गए हैं।

1. (एलएलपी) लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप सीमित देयता भागीदारी एवं
2. (ओपीसी) वन परसन कंपनी एक व्यक्ति कंपनी

सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) (Limited Liability Partnership)

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप छोटे बिजनेस के लिए उपयुक्त संरचना है। इसे सीमित देयता भागीदारी भी कहते हैं। यह सामान्य भागीदारी से अलग संरचना है।

यह लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप अधिनियम 2008 के अंतर्गत पंजीकृत होती है।

यदि आप बिजनेस को अपने सहयोगियों की मदद से चलाने का सोच रहे हैं तो आप सीमित देयता साझेदारी संरचना का चयन कर सकते हैं।

यह एक अलग कानूनी इकाई होती है, एलएलपी में भागीदारों की देनदारियां केवल अपने सहमत योगदान तक ही सीमित होती हैं।

एक व्यक्ति कंपनी (वन परसन कंपनी)
(One Person Company)

एक व्यक्ति कंपनी (ओपीसी) वर्तमान में अकेले व्यक्ति के लिए बिजनेस शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है।

इसे वर्ष 2013 से अस्तित्व में लाया गया है। एक ओपीसी को केवल 1 लाख रुपये की न्यूनतम पूंजी के साथ पंजीकृत किया जा सकता है।

एक व्यक्ति कंपनी में केवल एक निदेशक होता है जो एकमात्र शेयरधारक होता है। इस संरचना में कम कानूनी औपचारिकताएं हैं।

एवं सीमित कर लाभ प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति सीमित देयता के साथ कंपनी बनाना चाहते हैं उन्हें ओपीसी में पंजीकरण करवाना चाहिए।

 प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

निजी लिमिटेड कंपनी बिजनेस का बहुत लोकप्रिय एवं सर्वाधिक प्रचलित रूप है।

इन कंपनियों को भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 या उसके पहले के अधिनियमों के अंतर्गत रजिस्ट्रार आफ कंपनीज से पंजीकृत होना चाहिए।

एक निजी सीमित कंपनी शुरू करने के लिए, आपको कम से कम 2 लोगों और अधिकतम 200 लोगों की आवश्यकता होती है।

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का मालिकों से अपना अलग कानूनी अस्तित्व होता है। कंपनी के मालिक शेयरधारक होते हैं।

कंपनी के बिजनेस का प्रबंध निर्देशकों द्वारा किया जाता है। जिन्हें शेयरधारकों द्वारा चुना जाता है।

यह संरचना बैंक से एवं अन्य निवशकों से फाइनेंस (वित्त पोषण) के लिए उत्तम है।

इसके अंतर्गत मालिकों को सीमित दायित्व की सुरक्षा प्राप्त रहती है तथा वे लोग अपने स्वामित्व को सरलता से हस्तांतरित भी कर सकते हैं।

यदि आप स्वयं पूंजी निवेश कर अकेले बिजनेस कर सकते हैं तो आप एकल स्वामित्व स्वरूप चुन सकते हैं।

भागीदारी स्वरूप में आपको दूसरों से पूंजी श्रम तथा कौशल की भी सहायता मिल सकती है

इसी तरह यदि बिजनेस का स्वरूप बड़ा है तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी अथवा वन परसन कंपनी का भी सोच सकते हैं।

बिजनेस संरचना से सबंधित अधिक जानकारी हेतु लेख पढें।

अब तक आपने बिजनेस स्थापित करने संबंधी सभी प्लानिंग पूरी कर ली है।

वित्तीय आवश्यकताओं का इंतजाम भी कर लिया है। लोन के लिए आवदेन दिया था वह भी स्वीकृत हो गया है। अगला अहम चरण है अपने बिजनेस प्लान को व्यवहार में लाना।

बिजनेस का नामकरण एवं आवश्यक पंंजीयन करना

“बिजनेस कैसे शुरू करें” गाइड के इस चरण में आपको बिजनेस प्लान अनुसार अपने बिजनेस के पंजीयन एवं आवश्यक लाइसेंस तथा सरकारी अनुमतियाँ प्राप्त करना है।

अपने बिजनेस का नाम निर्धारित करना

अपने बिजनेस का एक छोटा, सरल और अच्छा सा नाम तय करें। प्रयास यह रहे कि नाम बेहद व्यावसायिक, उपयुक्त, अनोखा एवं आकर्षक हो।

आप अपने व्यवसाय को वैध बनाने के लिए स्थानीय शासन, नागरिक निकाय से नगर पालिका या ग्राम पंचायत से भी अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।

आपको अपना बिजनेस शुरू करने के लिए आवश्यक लाइसेंस और परमीशन भी लेना चाहिए।

इनकी जरूरत बैंक में खाता खुलवाने, लोन लेने और कई अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी होती है।

इन्हें आप ऑनलाइन ऑफ़लाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं। आनलाइन पंजीकरण में समय एवं पैसा कम लगता है। तथा परेशानी भी नहीं होती है।

आप कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय(एमसीए) के साथ व्यापार को पंजीकृत करने के लिए आवेदन करके आसानी से बहुत सी समस्याओं को दूर कर सकते हैं।

पंजीकृत और प्रतिष्ठित कानूनी फर्मों या एजेंटों के द्वारा भी आप अपने बिजनेस के लिए लाइसेंस एवं परमीशन प्राप्त कर सकते हैं।

आपको इनके बारे में अधिक चिंतित होने की जरूरत भी नहीं है, जब तक कि यह आपके बिजनेस को सीधे प्रभावित न करें।

अपनी बिजनेस संरचना का नाम सुरक्षित करने के लिए आप एमसीए 21 वेबसाइट पर जाकर अपने कंपनी के वांछित नाम की जांच कर सकते हैं।

आपकी सुविधा के लिए हम बिजनेस शुरू करने के लिए जरूरी लाइसेंस एवं परमीशनों की जानकारी दे रहे हैं।

आपको केवल उन्हीं के लिए के लिए आवेदन करना है, जो आपके बिजनेस की प्रकृति स्वरूप एवं नियमानुसार आवश्यक हैं।

सीमित देयता भागीदारी के पंजीयन के लिए आपको भागीदारीनामा तैयार करना होगा।

जिसमें भागीदारों के नाम और पते, व्यवसाय का सत्व, पूंजी निवेश और लाभ-हानि वितरण अनुपात सभी विवरण पर सबकी सहमति हो।

ओपीसी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पंजीयन के लिए आपको मेमोरेंडम आफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स आफ एसोसिएशन दोनों दस्तावेजों को तैयार करना होगा।

आप INC-29 में दोनों दस्तावेजों मेमोरेंडम आफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स आफ एसोसिएशन को संलग्न कर रजिस्ट्रार आफ कंपनीज को आवेदन कर सकते हैंं। एवं निगमन का प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।

डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) प्राप्त करना।

डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र एक इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण पत्र है। यह अपने बिजनेस की पहचान है।

इसे केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत डीएससी विक्रेताओं से लिया जा सकता है। इससे आप कई ऑनलाइन सरकारी लेनदेन कर सकते हैं।

यह वार्षिक रिटर्न दाखिल करने, आयकर ई-फाइलिंग, ई-टेंडर आदि के लिए भी उपयोगी है।

डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) प्राप्त करना।

निदेशक पहचान संख्या (डीआईएन) यह एक अद्वितीय 8 अंकों की संख्या है। यह एक विशेष पहचान संख्या होती है।

यह किसी कंपनी के मौजूदा या प्रस्तावित निदेशक को भारत सरकार के कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी होता है।

इसके लिए आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

स्थायी खाता संख्या (पैन) प्राप्त करना

आपको अपने बिजनेस के लिए एक स्थायी खाता संख्या की जरूरत होगी। यह बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

इसके बिना किसी भी बिजनेस का पंजीकरण नहीं हो सकता है। पैन के लिए आवेदन ऑनलाइन भी किया जा सकता है।

व्यवसाय का एक बैंक खाता खुलवाएं

आपको अपने बिजनेस के पंजीकृत नाम से किसी बैंक में चालू खाता (करेंट अकाउंट) खुलवाना चाहिए।

ऐसे बैंक का चयन करें जो कि सुलभ उपलब्ध हो।

कम शुल्क पर अच्छी सुविधाएँ देता हो। ओवरड्राफ्ट ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराता हो।

एमएसएमई उद्योग आधार पंजीकरण प्राप्त करना।

आप इसके लिए आवेदन एमएसएमई की वेबसाइट पर ऑनलाइन कर सकते हैं। यह मुफ्त और बहुत सरल है।

इसके लिए आपके पास आपका आधार कार्ड होना चाहिए।

इसका उद्देश्य बिजनेस पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाकर बिजनेस को बढ़ावा देना है।

कर खाता संख्या (TAN) प्राप्त करना।

TAN कर संग्रह खाता संख्या या कटौती खाता संख्या, यह दस अंकों की एक विषिश्ट संख्या है। यह आयकर विभाग द्वारा पंंजीयत संस्थानों को जारी की जाती है।

उन सभी संस्थानों को TAN नंबर लेना जरूरी होता है, जिन्हें स्रोत पर कर या कटौती करना आवश्यक होता है।

इसके पंजीयन के लिए आप यूटीआई या एन एस डीएल की वेबसाइट पर आनलाइन फॉर्म 49 बी में आवेदन कर सकते हैं।

दुकान और स्थापना पंजीयन प्रमाण पत्र करना।

यह सभी बिजनेस के लिए अनिवार्य है। आप इसे स्थानीय शासन से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

GSTIN जी एस टी पंजीयन करवाना

ऐसे सभी बिजनेस संस्थान जो उत्पादों और सेवाओं के निर्माण या बिक्री में कार्यरत हैं, उन्हें माल और सेवाएँ कर का पंजीयन करवाना अनिवार्य है।

ऐसे बिजनेस जिनका टर्नओवर ₹40 लाख (कुछ राज्यों में ₹2लाख) से कम है उन्हें पंजीयन से छूट है।

जीएसटी क्या है ? पंजीयन कैसे कराएं संपूर्ण जानकारी यह जानकारी लेख गूड्स एंड सर्विसेज टैक्स तथा पंजीयन विधि में पढ़ें।

प्रोफेशनल टैक्स पंजीकरण कराना।

यह राज्य सरकार द्वारा पेशे पर लगाया जाने वाला कर है। यह कर सभी व्यवसायों और कर्मचारियों से लिया जाता है।

इसे राज्य पेशा कर कार्यालय से फार्म 1 में आवेदन कर संबंधित प्राधिकरण से प्रमाणपत्र प्राप्त किया जा सकता है।

IEC कोड प्राप्त करना।

आपकी विदेश व्यापार में रुचि है तो (IEC कोड) प्राप्त करें। आयातक निर्यातक कोड यह दस अंकों की संख्या है।

जिसे किसी भी बिजनेस को आयात निर्यात व्यापार करने के लिए प्राप्त करना चाहिए।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना।

आपके बिजनेस की प्रकृति अनुसार यदि आपको इसे लेना अनिवार्य है, तो आपको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से (एनओसी) नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना चाहिए।

एफएसएसएआई पंजीकरण कराना।

यह लाइसेंस केवल खाद्य पदार्थ से संबंधित बिजनेस करने वालों के लिए अनिवार्य है।

यदि आप इसे संबंधित बिजनेस बिजनेस कररहे हैं तो इसके लिए आवेदन कर सकते हैं

एग्मार्क प्राप्त करना।

यह केवल कृषि उत्पादों से संबंधित बिजनेस के लिए जारी किया जाता है।

यदि आप कृषि उत्पादों से संबंधित बिजनेस कर रहे हैं तभी आपको इसके लिए आवेदन करना चाहिए।

ट्रेडमार्क रजिस्टर करवाना।

ट्रेडमार्क उन शब्दों और चित्रों का एक संयोजन है जो सरकार के साथ आपके व्यवसाय से संबंधित है।

ट्रेडमार्क आपको ब्रांडिंग और विज्ञापन के माध्यम से अपने व्यवसाय में आपके द्वारा बनाए गए मूल्य के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा देता है।
आज हम विश्व व्यापी बाजार में बिजनेस कर रहे हैं तो ट्रेडमार्क लेना आवश्यक है

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में पंजीयन कराना ।

यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित है। यदि आपका बिजनेस इनके नियम की परिधि में आता है, तो आपको इस कार्यालय से पंजीयन करवाना चाहिए।

अपना ईसीएन कोड नंबर प्राप्त कर,उनके नियमानुसार कार्य करना चाहिए।

कर्मचारी राज्य बीमा योजना मे पंजीयन कराना।

आपके बिजनेस में यदि 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हों तो आपको इस संंस्थान से पंजीयन कराना चाहिए।

यह योजना कर्मचारियों को मौद्रिक चिकित्सा लाभ प्रदान करती है।

वर्तमान समय में आपका बिजनेस ऑनलाइन हो या ऑफ़लाइन, आपको अपने बिजनेस की वेबसाइट बनाना ही चाहिए।

 डोमेन नाम लेना और वेबसाइट बनाना

बिजनेस के पंजीकृत नाम अनुसार डोमेन नेम खरीदें। वेबसाइट से कई फायदे हैं। इसकी मदद से आप घर से भी काम कर सकते हैं।

ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं। ऑनलाइन आर्डर स्वीकार कर सकते हैं।

आप सोशल मीडिया के द्वारा अपने बिजनेस का विज्ञापन प्रचार प्रसार भी कर सकते हैं। “बिजनेस कैसे शुरू करें” गाइड के अगले चरण अनुसार

बिजनेस के लिए आवश्यक इंफ़्रास्ट्रक्चर बनाएं।

अब आप प्लान अनुसार अपने बिजनेस के लिए स्थान का चयन सम्पतियों की खरीद, उत्पादन से सम्बंधित संसाधन, जरूरत अनुसार वर्करों को जुटाना शुरू कर दें।

यदि आप आनलाइन बिजनेस स्टोर शुरू कर रहे हैं तो आप इसे अपने घर से ही शुरू कर सकते हैं।

यदि आप आफलाइन स्टोर या शोरूम खोल रहे हैं तो आपको अच्छे मार्केट में दुकान किराए पर लेना चाहिए।

यदि आप कोई सेवा व्यवसाय या उत्पादन कार्य करना चाहते हैं तो शुरुआत में घर से ही करें।

यदि आवश्यक हो तो घर या दुकान किराए पर भी ले सकते हैं। ज्यादा निवेश मशीन एवं उपकरणों पर ही करें।

आप कारखाने के लिए शेड का निर्माण भी कर सकते हैं।

आप औद्योगिक क्षेत्र में सरकार से रियायती दरों पर भूमि शेड लीज पर भी प्राप्त कर सकते हैं।

कच्चा माल, मशीनरी व उपकरण खरीदना

बेहतर उत्पाद एवं सेवा के निर्माण के लिए सस्ते कच्चे माल एवं बेहतरीन मशीन और उपकरणों की जरूरत होती है।

इसलिए मशीन एवं उपकरणों की ख़रीददारी करने से पहले, थोड़ा रिसर्च जरूर कर लें।

कोटेशन प्राप्त कर लें। तो कम मूल्य पर अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री खरीद सकते हैं

बिजनेस के लिए मानव संसाधन व्यवस्था

बिजनेस प्लान अनुसार यदि आवश्यक है तभी कर्मचारी नियुक्त करें।

प्रारंभ में काम कम होता है। यदि आप सब काम खुद कर सकते हैं, तो खुद ही सब काम कर लेना चाहिए।

यदि बिजनेस प्लान टीम आधारित है तो परफेक्ट टीम बनाएं। शुरुआत में कुछ कम पर अनुभवी कर्मचारियों को रखकर काम शुरू करें।

बाद में आवश्यकता होने पर बढ़ा सकते हैं।

उत्पाद व सेवा का निर्माण

बाजार की मांग अनुसार उत्पाद या सेवा का उत्पादन शुरू करें। प्रारंभ में उत्पादन पर नियंत्रण जरूरी होता है। त्यौहारों अथवा मौसम परिवर्तन अनुसार इसे कम ज्यादा किया जा सकता है।

 सेल्स एंड सर्विस

अब आपको अपने बिजनेस एवं उत्पाद से संबंधित जानकारी अधिक से अधिक ग्राहकों तक पहुंचाना है।

उसे मार्केट में बेचना है इसके लिए विज्ञापन प्रचार प्रसार आवश्यक है।

विज्ञापन का सस्ता विकल्प सोशल मीडिया के प्लेटफार्म सबसे बेहतरीन साधन है।

आप अपने बिजनेस के सोशल अकाउंट बना कर इनका उपयोग कर सकते हैं।

इसके अलावा आप टीवी, अखबार, पंपलेट आदि का भी उपयोग कर सकते हैं।

सही हिसाब किताब रखना।

व्यवसाय में प्रति दिन हो रहे मौद्रिक लेनदेन पर सही नियंत्रण होना बहुत जरूरी है।

इसके लिए आपके पास विश्वसनीय एकाउंटिंग और फाइनेंसियल रिपोर्टिंग सिस्टम होना चाहिए।

इसे आप खुद भी कर सकते हैं। यदि खुद नहीं कर सकते हैं तो इसके लिए किसी लेखापाल को अंश काल के लिए नियुक्त कर सकते हैं।

सरकारी नियामक अनुपालन करना

प्रत्येक बिजनेस के लिए कुछ सरकारी नियामक अनुपालन करना आवश्यक होता है।

आपके बिजनेस को विभिन्न विभागों को जो मासिक त्रैमासिक प्रगती रिपोर्टें भेजनी है उन्हें नियमित एवं अनिवार्य रूप से जमा करवाएं।

शुरुआत में अनावश्यक खर्चों से बचें, जिनके बिना काम किया जा सकता है उन पर व्यय स्थगित करें।

आशा है आप बिजनेस कैसे शुरू करें स्टेप बाय स्टेप गाइड को अच्छी तरह से समझ गए हैं। धीरज और विश्वास के साथ धीरे धीरे आगे बढते रहें।

आने वाला हर नया दिन आपको अधिक अनुभवी बनाता जाएगा।

शुरुआत में लाभ के मार्जिन पर कम ध्यान देकर ज्यादा फोकस अधिकतम बिक्री पर रखें।

हैप्पी बिजनेस लाइफ टू यू

ओके टाटा बाय।

 

7 thoughts on “बिजनेस कैसे शुरू करें ? स्टेप बाय स्टेप गाइड”

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