अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कैसे करें? आइए जानें!  

अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कैसे करेंअपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कैसे करें? आइए जानें!

अपने “बिजनेस का रजिस्ट्रेशन” कैसे करें? आइए जानें! इस लेख में हम व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी सभी लाइसेंस एवं परमीशन के बारे में चर्चा करने वाले हैं।

व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है,  क़ानूनी रूप से अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन  करना। 

एक बिजनेसमैन को किसी निश्चित राज्य में कानूनी रूप से अपने व्यवसाय को संचालित करने के लिए बिजनेस का रजिस्ट्रेशन करने के साथ-साथ अनेक पंजीयन प्रक्रियाओं को पूरा करने की जरूरत होती है।

इसमें उपयुक्त राज्य एजेंसी के साथ दाखिल होना एवं व्यवसाय लाइसेंस या परमिट के लिए आवेदन करना भी शामिल है।

बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कर संचालित करने के लिए अनेक तरह की कानूनी संरचनाएं उपलब्ध हैं।

इनके संबंध में हमने अपने लेख “व्यवसाय संरचना क्या है? अपने लिए सही व्यवसाय संरचना कैसे चुनें ।इस लेख में विस्तार से बताया है। यदि आपने इसे नहीं पढ़ा है, तो पहले इसे ही पढ़ें।

नए बिजनेस-मैन के मन में यह दुविधा हो सकती है कि वह अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन किस संरचना के अंतर्गत पंजीयत कराए।

व्यवसाय शुरू करने के पहले अपने बिजनेस  का रजिस्ट्रेशन कराना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है।

बिजनेस का स्वामी (मालिक) व्यवसायी किसी बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कराए बिना भी कारोबार कर सकता है।

आप बिना कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किए भी अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

जी हां आप बिजनेस का रजिस्ट्रेशन करवाए बिना भी अपना बिजनेस संचालित कर सकते हैं।

 इस स्थिति में आपको कुछ प्रतिबंध और जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

जैसे व्यवसाय से संबंधित किसी भी हानि या क्षति के लिए केवल आप ही उत्तरदायी ठहराए जावेंगे।

उन्हें पूरा करने की वैधानिक जवाबदेही भी केवल आप ही की होगी।

आगे बढ़ने से पहले एक नजर डालते हैं बिना लाइसेंस के व्यवसाय शुरू करने के संभावित परिणामों पर।

Table of Contents

 बिना लाइसेंस के व्यवसाय शुरू करने के संभावित परिणाम।

व्यवसाय बंद करने के लिए मजबूर किया जाना।

उपयुक्त लाइसेंस के बिना व्यवसाय संचालित किए जाने पर आपको उसे बंद करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

व्यवसाय बंद होने के बाद निम्नलिखित तीन चीजों में से किसी एक को किया जा सकता है।

1) आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करके आप अपना व्यवसाय फिर से शुरू कर सकते हैं।

2) फिर से शुरू करने के पहले आपके व्यवसाय को एक निश्चित समय के लिए परिवीक्षा में रखा जा सकता है।

3) आपका व्यवसाय लाइसेंस के लिए आवेदन स्थानीय सरकार द्वारा अस्वीकार भी किया जा सकता है।

जुर्माना एवं फीस की वसूली।

लाइसेंस के बिना व्यवसाय चलाना गैरकानूनी है। कानूनी उल्लंघन की सीमा स्थान, उद्योग और लाइसेंस की जरूरत के आधार पर अलग अलग हो सकती है।

इसके लिए आपसे जुर्माना और शुल्क की वसूली भी की जा सकती है।

मुकदमा दायर किया जा सकता है।

 आप यदि अपंजीकृत व्यवसाय संचालित कर रहे हैं, तो आप अपने व्यवसाय के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। आप पर मुकदमा दायर किया जा सकता है।

ख्याति की हानि।

यदि आपका व्यवसाय आवश्यक लाइसेंस के बिना संचालित होता है, तो आपके ग्राहक नैतिकता की दृष्टि से आप पर संदेह कर सकते हैं।

बिजनेस का रजिस्ट्रेशन करवाना उसको आवश्यक वैधता, मान्यता, हस्तांतरणीयता, उधार क्षमता, कराधान और पैसे जुटाने की क्षमता प्रदान करता है।

इसकी जरूरत बैंक में खाता खुलवाने, लोन लेने और अन्य कई लाभदायक एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी होती है।

अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन करते समय, यह ध्यान रखें कि प्रत्येक व्यावसायिक संरचना में अनुपालन के विभिन्न स्तर होते हैं।

आपको अपना बिजनेस शुरू करने के लिए विभिन्न सरकारी संस्थानों से आवश्यक लाइसेंस और परमिट भी लेना होगा।

इस लेख में हमने उक्त सभी की जानकारी प्रदान की है आप केवल उन्हीं के लिए आवेदन करें, जो आपके बिजनेस की प्रकृति एवं स्वरूप अनुसार जरूरी हैं।

 सोल प्रोपराइटरशिप बिजनेस का पंजीकरण।

विभिन्न व्यवसाय संरचनाओं के लिए अपने अपने अलग कानून और नियम बनाए गए हैं। भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 में सभी प्रकार के व्यवसायों के पंजीकरण से संबंधित नियम दर्शाए गए हैं।

एकल स्वामित्व बिजनेस का रजिस्ट्रेशन संबंधित आवश्यक जानकारी।

प्रोप्राइटरशिप बिजनेस एकमात्र स्वामित्व व्यवसाय या एक व्यापारी फर्म व्यवसाय भारत में कंपनी पंजीकरण का सबसे आसान तरीका है।

इस व्यवसाय संरचना का प्रबंधन एक ही व्यक्ति करता है। यदि आप अपने व्यवसाय का पूर्ण नियंत्रण कर रहे हैं, तो यह संरचना आपके लिए एक आदर्श विकल्प है।

मालिक और एकल स्वामित्व व्यवसाय को कानूनी रूप से एक ही इकाई माना जाता है। मालिक का पैन फर्म का पैन होगा।

इसलिए, व्यवसाय की कोई अलग कानूनी पहचान नहीं होगी। व्यवसाय एवं मालिक की संपत्ति और आर्थिक जिम्मेदारी भी एक ही होगी।

एकल व्यवसाय में आपको दोहरे कराधान की जरूरत नहीं है। आपको केवल अपनी आय पर ही इनकम टैक्स रिटर्न देना है।

एकल स्वामित्व व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक न्यूनतम पूंजी की कोई सीमा नहीं है।

सोल प्रोपराइटरशिप बिजनेस के लिए किसी भी सरकारी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है, ना ही कोई विशेष अनुपालन की आवश्यकता होती है।

एकल स्वामित्व (प्रोपराइटरशिप फर्म) का कोई निगमन का प्रमाणपत्र या पंजीकरण का प्रमाणपत्र नहीं होता।

आपको एकल स्वामित्व बिजनेस का रजिस्ट्रेशन से संबंधित कोई भी दस्तावेज़  राज्य या स्थानीय शासन के पास फाइल (दाखिल) करने की भी जरूरत नहीं है।

एकमात्र प्रोपराइटरशिप बिजनेस का रजिस्ट्रेशन आवश्यकताएं।

प्रोपराइटरशिप फर्म का मालिक एक भारतीय नागरिक और निवासी होना चाहिए।

अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्ति केवल भारत सरकार से पूर्व अनुमोदन के पश्चात प्रोपराइटरशिप फर्म में निवेश कर सकते हैं।

एकमात्र स्वामित्व बिजनेस का रजिस्ट्रेशन हेतु आवश्यक दस्तावेज।

1. प्रोपराइटर की पहचान के लिए दस्तावेज आधार कार्ड या पैन कार्ड की कॉपी,

2. व्यवसाय के पंजीकृत कार्यालय के पते का प्रमाण

व्यवसाय स्थल का उपयोगिता बिल, मकान के कागजात या व्यवसाय के नाम पर रेंटल एग्रीमेंट।

3. प्रोपराइटर का आयकर रिटर्न।

4. प्रोपराइटर का फोटो।

 एकमात्र प्रोपराइटरशिप बिजनेस रजिस्ट्रेशन विधि।

 1. पैन कार्ड प्राप्त करना।

पैन कार्ड के लिए आवेदन करें। यदि यह आपके पास पहले से उपलब्ध है तो आवेदन करने की जरूरत नहीं है।

इसके लिए यूनिट ट्रस्ट आफ इंडिया (यू यूटी आइ) या राष्ट्रीय प्रतिभूतियां भंडार सीमित (एनएसडीएल) में

आनलाइन आवेदन करना होगा।

यहां पढे़ंः पैन परमानेंट एकाउंट नंबर कैसे प्राप्त करें

 2. व्यवसाय का नाम रखना।

अपने व्यवसाय का नाम रखें यह आपका नाम या अन्य कोई भी नाम हो सकता है। कोई औपचारिक पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।

इसलिए एकल स्वामित्व फर्म पंजीकृत ट्रेडमार्क का उल्लंघन ना करनेवाला कोई भी नाम धारण कर सकती हैं।

यदि आप व्यवसाय के नाम का विशेष उपयोग सुनिश्चित करना चाहते हैं तो इसका एकमात्र तरीका है व्यवसाय के नाम का ट्रेडमार्क पंजीयन प्राप्त करना।

3. दुकान एवंं स्थापना लाइसेंस प्राप्त करना।

आपको दुकान एवंं स्थापना अधिनियम (राज्य कानून) के तहत व्यवसाय के नाम का लाइसेंस लेना होगा।

अलग अलग राज्यों में दुकान एवंं स्थापना अधिनियम के अनुसार इसका शुल्क अलग अलग हो सकता है।

इसके लिए निर्धारित शुल्क सहित आवश्यक आवेदन पत्र स्थानीय शासन के कार्यालय में जमा करना होता है।

4. एमएसएमइ पंजीकरण।

आपकी प्रोपराइटर शिप फर्म का पंजीयन एमएसएमइ (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय) या उद्योग आधार के साथ पंजीकृतकरवा सकते हैं। यह व्यवसाय के नाम पर प्राप्त किया जा सकता है। यह एमएसएमइ की वेबसाइट पर निःशुल्क है।

5. जीएसटी पंजीकरण।

आवश्यक सरकारी कर जमा करने के लिए आपको जीएसटी पंजीयन भी लेना होगा।

अगर आपकी वार्षिक विक्रय ₹40 लाख से (पहाड़ी क्षैत्रों में ₹20 लाख) ज्यादा होती हो तो आपको जीएसटी पंजीयन करवाना होगा।

जीएसटी पंजीयन नि:शुल्क है। आप स्वयं कर सकते हैं

6. बिजनेस के नाम पर बैंक में चालू खाता खोलना।

आपको अपने एकमात्र स्वामित्व व्यवसाय के नाम से बैंक में चालू खाता खोलना होगा।

यहां पढेः बैंक में खाता कैसे खोलें

7. टैन (TAN) टेक्स एकाउंट नंबर पंजीकरण।

यदि आप वेतन भुगतान कर रहे हैं, जिसमें टीडीएस कटौती की आवश्यकता है तो आप आयकर विभाग से स्वामी के लिए टैन का पंजीकरण प्राप्त कर सकते हैं।

8.आयात निर्यात कोड प्राप्त करें।

यदि आपको अपने एकल व्यवसाय में माल का निर्यात और/या आयात करने की आवश्यकता होती है तो आप अपने एकल स्वामित्व व्यवसाय के नाम पर – आयात निर्यात कोड या आय इ (IE) कोड (DGFT)डीजी एफ टी से प्राप्त कर सकते हैं।

9. एफ एस एस ए आइ (FSSAI ) पंजीकरण करवाएं।

यदि आप अपनी प्रोपराइटरशिप फर्म के द्वारा खाद्य उत्पादों की बिक्री या खाद्य उत्पादों की सेवा करते हैं, तो आपको भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से एफएसएसएआइ पंजीकरण प्राप्त कर लेना चाहिए।

नोट:- आप उपरोक्त समस्त कार्य किसी प्रोफेशनल व्यक्ति या संस्थान को शुल्क देकर भी करवा सकते हैं।

 एकल स्वामित्व व्यवसाय की सीमाएं।

एकल स्वामित्व फर्म एक व्यक्ति के स्वामित्ववाली और उसके द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित की जाने वाली व्यावसायिक संस्थाएं हैं। इसलिए वे शेयर जारी नहीं कर सकतीं या उनके निवेशक नहीं हो सकते।

 एकल स्वामित्व व्यवसाय को किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।

केवल इसकी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को बिक्री के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकता है।

अमूर्त संपत्ति जैसे सरकारी अनुमोदन, पंजीकरण, आदि किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किए जा सकते।

एकल स्वामित्व व्यवसाय को आयकर विभाग में अपना वार्षिक आयकर रिटर्न दाखिल कराना होगा। हालांकि, वार्षिक रिपोर्ट या खातों को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में दायर करने की आवश्यकता नहीं है।

एकल स्वामित्व के लिए प्रत्येक वर्ष लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण तैयार करना आवश्यक नहीं है।

परंतु कुल बिक्री और अन्य मानदंडों के आधार पर टैक्स ऑडिट करवाया जाना आवश्यक हो सकता है।

यदि आप किसी भी कारणवश अकेले बिजनेस करने के स्थिति में नहीं हैं। तो आपके लिए साझेदारी व्यवसाय करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

पार्टनरशिप बिजनेस का रजिस्ट्रेशन  (Partnership Business) साझेदारी (भागीदारी) व्यवसाय)

साझेदारी फर्म हमारे देश की सबसे पुरानी व्यावसायिक संरचनाओं में से एक है। यह भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 द्वारा नियंत्रित होती है।

साझेदारी फर्म का गठन करना बहुत ही आसान है।

दो या दो से अधिक व्यक्ति जो अनुबंध करने के लिए सक्षम हैं, साझेदारी विलेख बनाकर अपना साझेदारी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

पार्टनरशिप फर्म में प्रत्येक पार्टनर की असीमित देयता होती है।

 फर्म का प्रत्येक भागीदार अपने अन्य सभी भागीदार साथियों के कार्यों के लिए बराबर का उत्तरदायी होता है।

साझेदारी व्यवसाय की विनियामक अनुपालन आवश्यकताएं बहुत सरल हैं।

हालांकि, कराधान एवं अन्य परिचालन संबंधित अनुपालन आवश्यकताएं भागीदारी फर्म पर भी समान रूप से लागू होती हैं।

साझेदारी फर्म एक कानूनी इकाई नहीं है। इसलिए इसका पंजीयन साझेदारों के विवेक पर निर्भर है, यानि वे चाहें तो पंजीयन कराएं या नहीं कराएं

साझेदारी बिजनेस का रजिस्ट्रेशन आप व्यवसाय शुरू करने से पहले भी करवा सकते हैं। या साझेदारी की निरंतरता के दौरान भी कभी भी करवा सकते हैं।

इसके लिए आपको केवल निर्धारित शुल्क एवं आवश्यक जुर्माना भरना होगा।

साझेदारी बिजनेस का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने की स्थिति में संभावित कठिनाईयां।

1.पार्टनरशिप फर्म को कानून के तहत करार शर्तों को लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

2.एक अपंजीकृत फर्म किसी भी कारण (जैसे कुप्रबंधन, चोरी आदि) के लिए किसी भागीदार साथी के खिलाफ मामला दायर नहीं कर सकती है

3.अनरजिस्टर्ड फर्म का कोई भी भागीदार अपने भागीदार साथियों के खिलाफ मुकदमा दायर नहीं कर सकता है।

4.साझेदारी फर्म किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ मुकदमा दायर नहीं कर सकती है।

बिजनेस का रजिस्ट्रेशन फर्म के अस्तित्व और उसकी वैधता का निश्चित प्रमाण भी होता है।

इसलिए हमेशा लिखित भागीदारी विलेख तैयार करने एवं फर्म को रजिस्ट्रार ऑफ फर्म के साथ पंजीकृत कराने में ही भलाई है।

आप किसी विशिष्ट व्यवसाय को अकेले करने में असक्षम है या अकेले निवेश नहीं कर सकते हैं, तो आप अपने विस्वासपात्र रिश्तेदारों एवं मित्रों के साथ भागीदारी फर्म स्थापित कर सकते हैं।

 साझेदारी बिजनेस का रजिस्ट्रेशन हेतु आवश्यक दस्तावेज।

1) प्राथमिक आईडी

सभी भागीदारों के आधार कार्ड,स्थायी खाता संख्या (पैन)

2) पता प्रमाण

सभी भागीदारों के नवीनतम पतों के प्रमाण के लिए बिजली का बिल, टेलीफोन बिल, बैंक स्टेटमेंट या बैंक पासबुक नवीनतम प्रविष्टियों के साथ

 3) पार्टनरशिप डीड

 सभी भागीदारों द्वारा निष्पादित एवं हस्ताक्षरित

4) व्यवसाय का मुख्य स्थान

परिसर से संबंधित (स्वामित्व के दस्तावेज या किराये / पट्टे समझौते) का प्रमाण

 साझेदारी बिजनेस का रजिस्ट्रेशन।

साझेदारी व्यवसाय का उपयुक्त नाम चयन करना।

व्यवसाय के लिए उसकी प्रकृति एवं स्वरूप के अनुरूप एक उपयुक्त अच्छा नाम चुनें।

नाम चुनते समय, इस बात का ध्यान रखें कि यह नाम किसी समान व्यवसाय करने वाले मौजूदा फर्म के समान नहीं होना चाहिए,

 यह नाम किसी अन्य व्यक्ति या निषिद्ध प्रतीक और नामों के ट्रेडमार्क का उल्लंघन नहीं करता हो। इस नाम में कोई ऐसे शब्द नहीं होना चाहिए जो सरकार की स्वीकृति या अनुमोदन को दर्शाते हों।

व्यवसाय का स्थान।

साझेदारी फर्म का एक उचित एवं अधिकारिक पता होना बहुत आवश्यक है। इसी पते पर सभी जरूरी व्यवसायिक संचार किए जाएंगे।

इस पते से ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि फर्म किस रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत पंजीयत की जा सकेगी।

पार्टनरशिप डीड निष्पादित कर नोटरी करवाना।

सांझेदारीनामा तैयार करें। इसमें फर्म और भागीदारों का नाम और पता, व्यवसाय का सत्व, पूंजीगत योगदान और लाभ-सहभाजन अनुपात जैसे विवरण के साथ साथ सभी भागीदारों के अधिकार, कर्तव्यों और देयताओं के विवरण शामिल किए जाते हैं।

फर्म के सभी साझेदार समझौते में उल्लिखित नियमों और शर्तों के द्वारा संचालित होते हैं। इसलिए साझेदारी विलेख में निम्नलिखित विवरण आवश्यक हैं:

 क) सामान्य विवरण

 1. फर्म और सभी भागीदारों का नाम और पता

 2. व्यवसाय की प्रकृति

 3. प्रत्येक भागीदार द्वारा व्यवसायिक पूंजी के योगदान की तिथि

 4. सभी भागीदारों द्वारा निवेशित पूंजी की राशि।

 5. भागीदारों के बीच लाभ / हानि साझा करने का अनुपात

 ख) विशेष विवरण

भविष्य में आपस में किसी मतभेद या विवाद की स्थिति से बचने के लिए कुछ विशेष जानकारी का भी उल्लेख किया जा सकता है:

1.भागीदारों द्वारा फर्म को प्रदान किए गए पूंजी निवेश पर, साझेदारों द्वारा आहरण या ऋण पर ब्याज का प्रावधान।

2.भागीदारों को देय वेतन, कमीशन या कोई अन्य राशि की जानकारी।

 3. प्रत्येक भागीदार के अधिकार सहित सक्रिय साझेदारों के अतिरिक्त अधिकारों का विवरण।

 4. सभी भागीदारों के कर्तव्य और दायित्व की जानकारी।

 5. सेवानिवृत्ति या साथी की मृत्यु के कारण या फर्म के विघटन की दशा में समायोजन की प्रक्रिया के संबंध में।

 6. भागीदारों में आपसी चर्चा एवं सहमति अनुसार तय की गईं अन्य धाराएं ।

 साझेदारी विलेख को निष्पादित करें सभी भागीदारों के हस्ताक्षर करवाएं एवं उचित स्टांप ड्यूटी के साथ मुहर लगाएं।

 स्टांप ड्यूटी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है। एवं सभी भागीदारों द्वारा निवेशित कुल राशि पर आधारित होती है।

 पंजीकरण के लिए आवेदन।

आजकल पंजीकरण के लिए आनलाइन रजिस्ट्रेशन सुविधा भी उपलब्ध है आप चाहें तो आनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।

आनलाइन आवेदन करने के साथ सभी जरूरी दस्तावेजों को स्कैन कर अपलोड करना होगा एवं शुल्क भी आनलाइन जमा करना होगा।

साझेदारी फर्म का पंजीकरण करने के लिए रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी द्वारा निर्धारित आवेदन (फॉर्म 1) में आवश्यक जानकारी भरें।

उपरोक्तानुसार उल्लेखित दस्तावेजों एवं निर्धारित शुल्क सहित आवेदन रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी कार्यालय में जमा करना होता है।

आवेदन सभी भागीदारों या उनके एजेंटों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाता है।

आवेदन प्राप्त होने पर, रजिस्ट्रार द्वारा दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। किसी तरह की कमीबेशी होने पर उसे संबंधितों से पूरा करवाता है।

 यदि वह सभी तरह से संतुष्ट है कि भागीदारी अधिनियम के प्रावधानों का सहीअनुपालन किया गया है तो फर्म को पंजीयन की, स्वीकृति प्रदान करता है।

इसके बाद रजिस्ट्रार फर्मों के रजिस्टर में फर्म के सभी विवरण दर्ज किए जाते हैं। तथा निर्धारित प्रारूप में एक पावती जारी की जाती है। उसके बाद सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन जारी किया जाता है।

रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी के कार्यालय में स्थित फर्मों के रजिस्टर में सभी फर्मों के बारे में नवीनतम जानकारी दर्ज रहती है।

इसे कोई भी व्यक्ति निर्धारित शुल्क का भुगतान कर निरिक्षण कर सकता है।

इस पंजीयन के अतिरिक्त कुछ अन्य सरकारी लाइसेंस परमीशन एवं पंजीयन के विवरण आगे बताए गए हैं। आवश्यक हैं।

जिन्हें आप अपने बिजनेस की प्रकृति एवं स्वरूप के अनुसार आवश्यकता होने पर करवा सकते हैं।

भागीदारी व्यवसाय में स्थित असीमित दायित्व से बचकर व्यवसाय करने के लिए आप सीमित देयता भागीदारी संरचना का विकल्प भी अपना सकते हैं।

 3. सीमित देयता साझेदारी लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) का पंजीकरण।

हमारे देश में सीमित देयता साझेदारी संरचना का प्रारंभ लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) अधिनियम (2008) के द्वारा किया गया है।

इसकी शुरुआत का मुख्य कारण सामान्य भागीदारी की सबसे बडी कमी साझेदारों की असीमित देयताओं को समाप्त करना है।

सीमित देयता भागीदारी की निगमन प्रक्रिया बहुत सरल है। इसमें बहुत कम अनुपालन औपचारिकताओं को पूरा करने की जरूरत होती है।

 एलएलपी पंजीकरण कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के कार्यालय के माध्यम से प्रशासित होता है।

एलएलपी के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज।

1. भागीदारों का आईडी प्रमाण।

आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र ड्राइविंग लाइसेंस, निवास कार्ड, सरकार द्वारा जारी कोई अन्य पहचान प्रमाण या पासपोर्ट।

विदेशी नागरिकों और अनिवासी भारतीयों के लिए पैन कार्ड या पासपोर्ट आवश्यक है।

 2. भागीदारों का पता प्रमाण।

 तीन महीने से कम पुराना बैंक नवीनतम बैंक स्टेटमेंट, फोन बिल, मोबाइल बिल या गैस बिल, ड्राइविंग लाइसेंस, निवास कार्ड या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र जिसमें पता शामिल है।

3. पंजीकृत कार्यालय प्रमाण।

पंजीकृत कार्यालय परिसर को प्रमाणित करने के लिए उससे संबंधित किसी भी उपयोगिता सेवा के बिल या रसीद जो दो महीने से अधिक पुराने नहीं हों।

 जैसे टेलीफोन, गैस, बिजली, या पानी का बिल या संपत्ति कर रसीद जिसमें उक्तपरिसर का पता दर्शाया गया है।

 4. सभी साझेदारों की पासपोर्ट साइज के फोटो।

सीमित देयता भागीदारी गठनके लिए नामित साझेदार पहचान संख्या या निदेशक पहचान संख्या प्राप्त करने के लिए, एक डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) की आवश्यकता होती है।

 साझेदारों के लिए डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) प्राप्त करना।

सीमित देयता भागीदारी गठन प्रक्रिया के प्रथम चरण में डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र प्राप्त करेंगे।

डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्राप्त करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

क्योंकि सभी दस्तावेज एवं अनुप्रयोग अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा डिजिटली हस्ताक्षरित किये जाते हैं।

 भागीदारों के लिए निदेशक पहचान संख्या प्राप्त करना।

  डिजिटल हस्ताक्षर प्राप्त हो जाने के बाद दूसरे चरण में निर्देशक पहचान संख्या (डीआईएन) के लिए आवेदन किया जा सकता है।

डीआईएन पंजीकरण आमतौर पर तुरंत होता है। परंतु कुछ मामलों में, डीआईएन आवेदन की मंजूरी के लिए डीआईएन सेल की ओर अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होते हैं।

 एलएलपी नाम अनुमोदन प्राप्त करना।

अगले चरण में दो नामित साझेदार पहचान संख्या प्राप्त हो जाने के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय एमसीए के पास नाम के आरक्षण के लिए आवेदन किया जा सकता है।

सीमित देयता भागीदारी का नाम ‘सीमित देयता भागीदारी’ के ‘एलएलपी’ शब्दों के साथ समाप्त होगा।

प्रस्तावित एलएलपी नाम सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 के तहत एलएलपी नाम उपलब्धता दिशानिर्देशों का पालन करेगा।

एलएलपी के लिए नाम दो तरीकों से रखा जा सकता है।

 1.आरयूएन (रिजर्व यूनिक नाम) प्रक्रिया के द्वारा।

आरयूएन एलएलपी नाम के आरक्षण के लिए एक आसान और वेब-आधारित अनुप्रयोग है।

इस प्रक्रिया के तहत अनुमोदित नाम अनुमोदन की तारीख से 90 दिनों की अवधि के लिए वैध है।

एक आवेदन में, दो नामों को आरयूएन प्रक्रिया के तहत अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।

यदि आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है, तो एक और दो और नाम फिर से जमा किए जा सकते हैं।

यदि वह भी आरओसी कार्यालय द्वारा खारिज कर दिया जाता है, तो एक नया आवेदन नए दाखिल शुल्क के साथ दायर किया जाएगा।

2. ई-फार्म FiLLiP द्वाराः (सीमित देयता भागीदारी को शामिल करने के लिए फॉर्म)

ई-फार्म FiLLiP एलएलपी निगमन प्रक्रिया नाम के आरक्षण के लिए एक एकीकृत एकल बिंदु अनुप्रयोग है।

प्रलेखन आवश्यकताओं के अनुसार निष्पादित और सत्यापित सभी दस्तावेजों को ई-फॉर्म FiLLip के तहत, डिजीटली हस्ताक्षरित केवल एक नाम अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है।

 निगमन के लिए फाइलिंग।

सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (सीआरसी) द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन उपरांत नाम अनुमोदन आवेदन एमसीए के माध्यम से स्वीकार कर लिया जाता है।

प्रस्तावित भागीदारों को एक एलएलपी नाम अनुमोदन पत्र जारी किया जाता है ।

साझेदारों के पास आवश्यक निगमन दस्तावेजों को दाखिल करने के साथ-साथ एलएलपी दर्ज करने के लिए 60 दिन होंते हैं।

यदि नाम अनुमोदन पत्र के 60 दिनों के भीतर एलएलपी का गठन नहीं होता है, तो एलएलपी के लिए एक नाम के लिए अनुमोदन फिर से प्राप्त करना होगा।

 पंजीकृत कार्यालय पते का प्रमाण।

पंजीकृत कार्यालय पते के प्रमाण को पंजीकरण के दौरान या उसके निगमन के 30 दिनों के अंदर प्रस्तुत करना होगा।

पंजीकृत कार्यालय को किराए पर लिया जाता है, किराये के समझौते या मकान मालिक से अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता होती है।

एलएलपी में किसी एक साथी की लापरवाही अथवा कदाचार के लिए कोई अन्य साथी जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं होता है।

लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप फर्म किसी भी प्रकार के शेयर जारी करने के लिए सक्षम नहीं हैं।

अतः एलएलपी को किसी भी ऐसे व्यवसाय जिसमें इक्विटी फंड जुटाने की योजना है, के लिए स्थापित नहीं करना चाहिए। जैसे एंजेल इनवेस्टर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट या प्राइवेट इक्विटी फंड्स आदि।

अन्य आवश्यक सरकारी लाइसेंस एवं परमीशन प्राप्त करना होगा।

यहां सभी के संक्षिप्त विवरण दिए जा रहे हैं। आप केवल उन्हीं के लिए आवेदन करें जो नियमानुसार आपके व्यवसाय के लिए आवश्यक हैं।

बिजनेस हेतु अन्य आवश्यक सरकारी लाइसेंस पंजीयन एवं परमीशन।

 1. स्थायी खाता संख्या (पैन) प्राप्त करना।

आपको अपनी व्यवसाय के लिए पैन नंबर की आवश्यकता होगी। पैन नंबर के लिए आप ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।

 2. व्यवसाय के लिए एक बैंक खाता।

आपको अपने बिजनेस के पंजीकृत नाम से किसी बैंक में चालू खाता (करेंट अकाउंट) खुलवाना होगा। ऐसे बैंक का चयन करें जो कि सुलभ उपलब्ध हो।

कम शुल्क पर अच्छी सुविधाएँ देता हो। ओवरड्राफ्ट की सुविधा देता हो। ऑनलाइन बैंकिंग तो आज के समय की ज़रूरत है।

 3. एमएसएमई उद्योग आधार पंजीकरण प्राप्त करें ।

इसके लिए आपको एमएसएमई की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना हैं। इसके लिए आधार कार्ड होना जरूरी है। यह मुफ्त और बहुत सरल है। इसका उद्देश्य बिजनेस पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाना है। तथा बिजनेस को बढ़ावा देना है।

4. अपना टैन नंबर प्राप्त करना।

 यह नंबर टैक्स भुगतान के लिए महत्वपूर्ण है। आप इसे अपने राज्य के आयकर विभाग के मूल्यांकन कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

 टैन नंबर ऐसी सभी व्यवसायिक इकाइयों के लिए लेना जरूरी होता है, जिन्हें स्रोत पर टीडीएस कटौती करना आवश्यक होता है।

टैन याने टैक्स एकाउंट नंबर प्राप्त करने के लिए आपको फॉर्म 49बी में यूटीआई या एन एस डीएल की वेबसाइट पर आनलाइन आवेदन करना होता है।

5.दुकान और स्थापना लाइसेंस प्राप्त करना।

अपनी एलएलपी हेतु दुकान और स्थापना अधिनियम के अनुसार राज्य / नगर निरीक्षक लाइसेंस प्राप्त कर लेना चाहिए।

इसे दुकान और स्थापना अधिनियम के तहत कार्य के शुरू होने के 30 दिनों के अंदर लेना चाहिए, चाहे उसमें कर्मचारी हों या न हों।

आवेदन में प्रबंधक का नाम, कंपनी का निर्दिष्ट नाम और स्थायी डाक पता और व्यवसाय श्रेणी शामिल है, को लागू शुल्क के भुगतान के साथ राज्य दुकान और स्थापना निरीक्षक को प्रदान किया जाना चाहिए। यह व्यापार लाइसेंस पंजीकरण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है।

6. गुड्स एवं सर्विसेज टेक्स रजिस्ट्रेशन कराए।

 सभी बिजनेस संस्थान जो उत्पादों और सेवाओं के निर्माण या बिक्री में कार्यरत हैं, उन्हें जीएसटी माल और सेवाएँ कर का पंजीयन करवाना अत्यंत आवश्यक है।

ऐसे बिजनेस जिनका टर्नओवर ₹40 लाख (कुछ राज्यों में ₹20 लाख) से कम है उन्हें पंजीयन से छूट है।

 7. प्रोफेशनल टैक्स पंजीकरण।

यह सभी प्रकार के व्यवसायों के लिए अनिवार्य है। प्रोफेशनल टैक्स राज्य सरकार द्वारा पेशे पर लगाया जाता है। इसे सभी व्यवसायों और कर्मचारियों से लिया जाता है। इसे राज्य पेशा कर कार्यालय से फार्म 1 में आवेदन कर संबंधित प्राधिकरण से प्रमाणपत्र प्राप्त किया जा सकता है।

8. आईईसी कोड प्राप्त करें ।

  यह आयातक निर्यातक कोड के लिए है और यह 10 अंकों की संख्या है। किसी भी प्रकार के विदेशी व्यापार के लिए आपको यह लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

9. कस्टम ड्यूटी ।

यह माल के आयात और निर्यात पर लगायी जाती है। जबकि यह एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है, सभी व्यवसायों को इसकी आवश्यकता नहीं है। इसलिए जांचें कि आपके व्यवसाय को कस्टम ड्यूटी की आवश्यकता है या नहीं।

10. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना।

यदि आपके बिजनेस की प्रकृति अनुसार आपको इसे लेना अनिवार्य है तो आपको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से (एनओसी) नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा।

  11. एफएसएसएआई पंजीकरण।

 -यह लाइसेंस सभी खाद्य स्टार्टअप के लिए अनिवार्य है। इसमें बेकरी, रेस्तरां, खाद्य मताधिकार आउटलेट, कैंटीन, कैफेटेरिया और यहां तक ​​कि छोटे रसोई घर शामिल हैं ।.

12. एग्मार्क के लिए आवेदन करें।

 यह कृषि उत्पादों से संबंधित बिजनेस के लिए दिया जाने वाला प्रमाणन चिह्न है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे विपणन और निरीक्षण निदेशालय द्वारा अनुमोदित मानकों के एक समूह के अनुरूप हैं, जो भारत सरकार की प्रमाणित एजेंसी है।

13. ट्रेडमार्क रजिस्टर करवाएं।

ट्रेडमार्क उन शब्दों और चित्रों का एक संयोजन है जो सरकार के साथ आपके व्यवसाय से संबंधित है।

ट्रेडमार्क आपको ब्रांडिंग और विज्ञापन के माध्यम से अपने व्यवसाय में आपके द्वारा बनाए गए मूल्य के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा देता है।

14. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में पंजीयन कराना।

यह संगठन एवं योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित है । यदि आपका बिजनेस इनके नियम की परिधि में आता है तो आपको इस कार्यालय से पंजीयन करवाना होगा । एक प्रतिष्ठान कोड नंबर (ईसीएन) प्राप्त करना होगा।

एवं उनके नियमानुसार कार्यवाही होगी।

15. कर्मचारी राज्य बीमा योजना।

जब बिजनेस में 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं तो इस संंस्थान से पंजीयन कराना होगा। यह योजना कर्मचारियों को मौद्रिक चिकित्सा लाभ प्रदान करती है।

16. बौद्धिक संपदा पंजीकरण प्राप्त करें।

ऐसा करने से, आप अपनी कंपनी या उत्पाद ब्रांड नाम की रक्षा कर सकते हैं। आप किसी भी नवीन उत्पाद को डुप्लिकेट होने से भी बचा सकते हैं। हमारे देश में, बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे ट्रेडमार्क और पेटेंट कंट्रोलर जनरल ऑफ़ पेटेंट्स, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क द्वारा नियंत्रित होते हैं।

आशा है आपको मेरा यह लेख “अपने बिजनेस का रजिस्ट्रेशन कैसे करें आइए जानें” जरूर पसंद आया होगा।

यदि आप इस संबंध में कोई भी कमेंट्स या टिप्पणी करना चाहते हैं तो कमेंट्स द्वारा सूचित करें। बाय-बाय मिलते हैं फिर एक नये लेख के साथ।

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