“ई-कामर्स व्यापार” बिजनेस करने का माडर्न तरीका

ई-कामर्स व्यापार



मित्रों, आइए जानते हैं क्या है ? “ई-कामर्स व्यापार” बिजनेस करने का माडर्न तरीका। आज हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं।

इससे आप यह आसानी से समझ जाएंगे की “ई-कामर्स व्यापार’ है? “ई-कामर्स व्ययापार ” माडेल कौन कौन से हैं ?

“ई-कामर्स व्यापार” से लाभ-हानि ? “ई-कामर्स व्यापार” कैसे काम करता है ? तथा “ई-कामर्स व्यापार” कैसे शुरू करें ? तो आइए शुरू करते हैं।

Table of Contents

“ई-कामर्स व्यापार” क्या है ?

ई-कॉमर्स अंग्रेजी शब्द Electronic Commerce (इलेक्ट्रॉनिक कामर्स ) का संक्षिप्त नाम है।

यह हमारे व्यापार करने का आधुनिक तरीका है। जो सभी के लिए सरल और सुविधाजनक है।

व्यापार के इस माडर्न तरीके में इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों द्वारा उत्पाद एवं सेवाओं का खरीदी -बिक्री, पैसों का हस्तांतरण, भुगतान, प्रचार-प्रसार, तथा डेटा स्थानांतरित करने का कार्य भी किया जाता है।

“ई-कामर्स व्यापार” ने परंपरागत व्यापार (क्रय विक्रय) में आने वाली बहुत सी बाधाओं को दूर कर दिया है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में बड़े बदलाव आ गये हैं।

“ई-कामर्स व्यापार” करने के लिए आपको दुकान या आफिस खोलने की भी जरूरत नहीं होती।

इसे आप कहीं से भी कर सकते हैं। यह बहुत सरल है। आप इसे इंटरनेट के द्वारा पीसी, लेपटॉप अथवा मोबाइल से भी कर सकते हैं।

“ई-कामर्स व्यापार” में उपभोक्ता एवं व्यापारी मीलों दूर रहते हुए भी आपस में संपर्क बना सकते हैं। वह भी खुद की सुविधा अनुसार, चौबीस घंटों में किसी भी समय।

“ई-कामर्स व्यापार” बिजनेस करने का माडर्न तरीका लोगों के दिलों में अच्छी तरह से रच बस गया है।

इसका प्रमुख कारण ऐसे उत्पाद जो कभी बाजारों में ढूंढने पर भी नहीं मिल पाते थे, आज वो सभी केवल एक बटन दबाने पर बड़ी आसानी से घर में पहुंचा कर दिए जा रहे हैं ।

“ई-कामर्स व्यापार”  का उपयोग आज एफिलिएट मार्केटिंग, आनलाइन शापिंग, गूगल एडवर्डस मार्केटिंग, आनलाइन बैंकिंग,आनलाइन निलामी, आनलाइन टिकट बुकिंग, आनलाइन टीचिंग, सोशल नेटवर्किंग आदि के लिए भी किया जा रहा है।

इस तरह अब आप घर में बैठे -बैठे पूरी दुनिया में अपना व्यापार फैला सकते हैं।

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“ई-कामर्स व्यापार” के माडेल (प्रकार) कौन कौन से हैं ?

ई-कॉमर्स बिजनेस के अनेक प्रकार हैं। इन्हें आप अपनी प्राथमिकताओं, पूंजी निवेश क्षमता और जानकारी के अनुसार चयनित कर सकते हैं।

बस आपको यह ध्यान रखना होगा कि अलग- अलग माडेल के लिए अलग- अलग तकनीकों और रणनीतियों का उपयोग करना होता है।

बी2बी (B2B)बिजनेस टू बिजनेस।

इस प्रारूप में बिजनेस टु बिजनेस यानी एक व्यापारी द्वारा दूसरे व्यापारी से वस्तुओं, सेवाओं, पैकिंग सामग्री आदि के इलेक्ट्रॉनिक सौदे किये जाते हैं।

इसमें उत्पादक, निर्माता, थोक विक्रेता, खुदरा व्यापारी सभी आपस में एक दूसरे से बिजनेस करते हैं।

इस माडेल में उपभोक्ताओं से सीधे व्यापार नहीं किया जाता है।

बीटूसी (B2C) बिजनेस टू कंज्यूमर्स ।

बिजनेस टू कंज्यूमर्स यह सबसे ज्यादा प्रचलित माडेल है। इस माडेल में विक्रेता व्यापारी का उपभोक्ताओं से सीधा संपर्क होता है।

इस माडेल में उपभोक्ता आनलाइन उत्पाद तथा सेवाओं के विवरण फोटोज एवं रिव्यूज देख सकते हैं।

किसी उत्पाद या सेवा के पसंद आने पर दोनों के बीच ई ट्रांजेक्शन (लेनदेन) कर लिया जाता है।

सीटूसी (C2C) कंज्यूमर्स टू कंज्यूमर्स।

कंज्यूमर्स टू कंज्यूमर्स इस माडल में एक उपभोक्ता दूसरे उपभोक्ता से आपस में ई ट्रांजेक्शन कर सकता है।

इसके अंतर्गत नई पुरानी वस्तुओं का क्रय विक्रय किया जा सकता है। इसे अधिकांश तृतीय पक्ष द्वारा ही करवाया जाता है।

सी टू बी (C2B) कंज्यूमर्स टू बिजनेस।

इस माडल में उपभोक्ताओं और विक्रेता व्यापारी के बीच ई ट्रांजेक्शन (लेनदेन) किया जाता है।

यह बी टू सी माडल के विपरीत है। इसमें एक उपभोक्ता अपनी वस्तुओं अथवा सेवाओं को सीधे एक व्यापारी को बेचता है।

ज्यादातर पेशेवर लोगों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है। इसमें पेंटिंग, फोटो, लोगो डिजाइनिंग विक्रय, वेबसाइट बनवाना जैसे कार्य सम्मिलित हैं।

कुछ कलाकार रायल्टी एवं शुल्क लेकर अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। संगीतज्ञ नृत्यकार आदि।

बी टू जी (B2G) बिजनेस टू गवर्नमेंट।

बिजनेस टू गवर्नमेंट इस माडेल में व्यापारी और सरकार, लोक प्रशासन के मध्य ई ट्रांजेक्शन किये जाते हैं।

इस माडेल को बिजनेस टू एडमिनिस्ट्रेशन माडेल भी कहते हैं।

इस ई-गवर्नेंस सेवा के माध्यम से सरकारें व्यापारियों से अपने लिए उत्पाद तथा सेवाओं की खरीदी करती हैं।

इसके अलावा वित्तीय, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार,कानूनी दस्तावेज और रजिस्ट्रार से संबंधित सेवाएं एवं अन्य व्यावसायिक सेवाएं भी शामिल हैं।

सी टू जी (C2G) कंज्यूमर्स टू गवर्नमेंट।

कंज्यूमर्स टू गवर्नमेंट माडेल में व्यक्ति और सरकार के मध्य ई ट्रांजेक्शन किया जाता है। इसे कंज्यूमर टू एड्मिनास्ट्रेशन माडेल भी कहते हैं ।

ई-गवर्नेंस सेवा के द्वारा आम आदमी अपने शिक्षा स्वास्थ्य टेक्स सरीखे सभी सरकारी काम करते हैं। जैसे ई-पंजियन ई-फायलिंग दूरस्थ शिक्षा आदि।

“ई-कामर्स व्यापार” से लाभ।

ई-कॉमर्स सभी व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के लिए बहुत लाभदायक हैं। इसने खरीदी बिक्री व्यापार को बहुत लोचदार बना दिया है।

व्यापारी तथा ग्राहक दोनों जरा सी देर में अपने मनचाहे टारगेट (लक्ष्य) तक सरलता से पंहुच सकते हैं।

विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से हर कोई घर बैठे कभी भी आनलाईन खरीदी बिक्री कर सकता है।

व्यापारीयों को लाभ।

1) ई-कामर्स इंटरनेट से होम बिजनेस करके पैसे कमाने का आसान तरीका बन गया है। इसे बहुत कम लागत से शुरू किया जा सकता है।

2) आनलाइन स्टोर शुरू करने हेतु ना ही दुकान के लिए जगह चाहिए। और ना ही फर्नीचर तथा स्टाक रखने की जरूरत है।

3) अधिक ग्राहकों तक आसान पहुंच। आनलाइन स्टोर किसी सीमा या स्थान तक सीमित ना होकर पूरी दुनिया में पहुंचता है। इससे आसानी से नए ग्राहक मिल जाते हैं।

4) सोसल मीडिया एवं अच्छे सर्च इंजिन के द्वारा लक्षित ग्राहकों तक पहुंचने में सहायता मिलती है।

5) समय का बंधन नहीं: आनलाइन स्टोर स्वचलित प्रणाली होने के कारण चौबीस घंटे सातों दिन पूरे वर्ष भर खुला रहता है।

6) व्यापारी को दूसरे निजी काम के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। परिवार के साथ रहते हुए भी वह टेंशन मुक्त रह कर सभी कार्य सरलता से कर सकता है।

7) व्यापार में उधार लेनदेन से छुटकारा मिल जाता है। जिससे ना ही उधार वसूली की झंझट रहती है, और ना उधार चुकाने की टेंशन।

8) एक तरफ कम लागत, कम खर्चे, दूसरी तरफ लाभ का अधिक मार्जिन, अधिक ग्राहक, अधिक विक्रय, अधिक लाभ होने से व्यापारी के फायदे का अनुपात भी बढ़ जाता है।

9) भुगतान प्राप्ती में सुविधा। भुगतान प्राप्त करना बहुत सरल हो जाता है। पेमेंट गेटवे के द्वारा इसे मोबाइल पर भी प्राप्त किया जा सकता है।

इस तरह नगद लेनदेन, केश रखने, बैंक से निकालने, जमा करने सभी की परेशानी दूर हो जाती है।

10) कम लागत, कम समय में सरलता पूर्वक अधिक प्रचार प्रसार मार्केटिंग की सुविधा प्राप्त हो जाती है।

ग्राहकों को लाभ।

1) ग्राहक घर बैठे अपने मनपसंद उत्पादों का चयन कर सकता है। उसे बाजार में लाए गए नए उत्पादों की जानकारी भी आसानी से मिल जाती है।

वह नए उत्पाद का मार्केट में फीडबैक कैसा है ? यह भी जान सकता है।

2) ग्राहक घर में ही बैठे- बैठे अनेक उत्पादों का तुलनात्मक अध्ययन कर सकता है।

इससे वह न्युनतम मूल्य में अपना पसंदीदा उत्पाद अपने बजट में खरीद सकता है।

3) ग्राहकों को अपने मनचाहे स्थान पर डिलीवरी प्राप्त करने की सुविधा मिलती है।

वह अपनी मर्जी अनुसार जहां चाहे वहां डिलीवरी प्राप्त कर सकता है। उसे उत्पाद के परिवहन पर अलग से खर्चा नहीं करना पड़ता है।

4) ग्राहक को घर से बाहर नहीं जाना है। इसलिए उसको ट्राफिक पार्किंग का झंझट नहीं रहता है।

परिवहन पर होने वाले खर्च तथा समय की बचत अतिरिक्त हो जाती है।

5) ग्राहकों को आनलाइन खरीदी पर बहुत सारे ऑफर भारी डिस्काउंट, फ्री कूपन, फ्री उपहार आदि का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो जाता है।

6) खरीदी करने के लिए समय की कोई पाबंदी नहीं होती। जब चाहे सुविधानुसार खरीदी संभव होती है।

7) अलग अलग सामान के लिए अलग अलग दुकान पर जाने की जरूरत नहीं रहती।

भीड़ होने पर अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ता। इन मुसीबतों से मुक्ति एवं समय की भी बचत होती है।

8) आनलाइन स्टोर में रजिस्टर्ड ग्राहकों का पिछला सर्च एवं खरीदी का डाटा सेव रहता है।

जिसकी मदद से शापिंग कार्ट साफ्टवेयर उनकी पसंद एवं बजट के उत्पाद सर्च में उपलब्ध कराते हैं, जिससे कम समय में आसान खरीदी संभव हो जाती है।

“ई-कामर्स व्यापार” से नुकसान।

1) उत्पाद को छूकर देखकर जांचने की सुविधा नहीं होती। फोटो विवरण से सही उत्पाद के चयन में गल्ती होने पर अधिक दाम में घटिया उत्पाद मिल सकता है।

2) फिजूलखर्ची की संभावना उत्पादों को देख कर, फ्री डिस्काउंट कूपन, फ्री उत्पाद के झांसे में आप गैर जरूरी उत्पाद की खरीदी कर सकते हैं। जो आपके बजट को भी बिगाड़ सकता है।

3) ग्राहक सेवा में कमी हो सकती है। उत्पाद की डिलेवरी तथा विक्रय उपरांत सेवा में भी देरी हो सकती है।

4) आनलाइन खरीदी वही कर सकते हैं जिन्हें तकनीकी ज्ञान है। तकनीकी विकास से सिस्टम में बार बार बदलाव से व्यापारी उपभोक्ता दोनों को असुविधा होती है।

5) व्यापारी का ग्राहक से सीधा संपर्क नहीं हो पाता। इससे कभी भी धोखाधड़ी हो सकती है।

समझदारी और सावधानी से ही संभावित हानि से बचा जा सकता है।

“ई-कामर्स व्यापार” कैसे काम करता है ?

ई-कामर्स बिजनेस (आनलाइन व्यापार, इंटरनेट व्यापार) उसी तरह से काम करता है जैसे हमारे खुदरा स्टोर्स काम करते हैं।

इसमें अधिकांश कार्य स्वचालित होता है। यहां पर हम आपको वह पूरी प्रक्रिया बता रहे हैं, जो कि एक ई-कॉमर्स की उन्नत एवं परिष्कृत प्रणाली द्वारा अपनाई जाती है।

यह भी संभव है कि सभी सिस्टम इसी तरीके से काम ना करते हों। या फिर, उनका काम करने का तरीका कुछ अलग हो।

  • ग्राहक अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पर आनलाइन आर्डर करने के लिए अपनी पसंद की वेबसाइट पर जाता है।
    मनचाहे उत्पाद की तलाश करता है। उससे संबंधित जानकारी प्राप्त करता है।
    क्रय करने के लिए वेब पृष्ठ पर बताए अनुसार आदेश देने की प्रक्रिया को पूरी करता है।
    हर बार क्लिक करने पर उसे केवल वेब ब्राउज़र पर कुछ प्रोसेस होता दिखाई देता है।
  • वेबसर्वर ग्राहक के आदेश को आर्डर मेनेजर को भेजता है। आर्डर मेनेजर का ग्राहक से सीधा संवाद स्थापित हो जाता है।
  • आर्डर मेनेजर का ग्राहक के आदेश की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक पूरा नियंत्रण रहता है।
  • आर्डर मेनेजर इन्वेन्ट्री मेनेजमेंट से पता लगाता है कि ग्राहक द्वारा आदेशित वस्तु डाटाबेस में उपलब्ध है अथवा नहीं।
  • वस्तु का स्टाक नहीं होने की स्थिति में इन्वेन्ट्री मेनेजमेंट का संवाद थोक विक्रेता या निर्माता के सिस्टम से स्थापित हो जाता है।
  • इन्वेन्ट्री प्रबंधन उन्हें वस्तु प्रदाय करने का आदेश देता है तथा आपूर्ति का अनुमानित समय भी ज्ञात कर लेता है।
  • इन्वेन्ट्री प्रबंधन आदेशित वस्तु की स्टाक में होने अथवा उपलब्ध होने की संभावित तारीख आदेश मेनेजर को संप्रेषित कर देता है।
  • आर्डर मेनेजर माल की उपलब्धता और डिलीवरी का संभावित दिनांक का विवरण ग्राहक को भेजता है।
  • ग्राहक के आदेश कन्फर्म करने पर, आदेश मेनेजर के द्वारा उसके डेबिट / क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स मर्चेन्ट सिस्टम अथवा बैंक को पेमेंट प्राप्त करने के लिए संप्रेषित कर दिए जाते हैं।
  • मर्चेन्ट सिस्टम या बैंक ग्राहक के बैंक या मर्चेन्ट सिस्टम के कंप्यूटर से संचार स्थापित कर इस बात की पुष्टि कर लेता है कि ग्राहक के खाते में पर्याप्त बैलेंस है या नहीं।
  • मर्चेंट सिस्टम या बैंक लेनदेन की प्रक्रिया को पूरा करते हुए भुगतान प्राप्त कर लेता है। एवं इसकी पुष्टि करते हुए आदेश मेनेजर को आगे बढ़ने के लिए अधिकृत करता है।
  • आदेश प्रबंधक इस बात की पुष्टि होने पर की लेन-देन सफलता पूर्वक संसाधित कर लिया गया है, वह वेब सर्वर को सूचित करता है।
  • वेब सर्वर द्वारा ग्राहक को एक नोट द्वारा कन्फर्म किया जाता है कि उसका आदेश स्वीकार हो गया है। इसमें आर्डर संख्या दर्शाई जाती है।
  • ऑर्डर मेनजर भंडार को ग्राहक के आदेशानुसार माल भेजने की सूचना देता है।
  • भंडार द्वारा आदेशानुसार माल पैकिंग कर कोरिअर सर्विसेज को सौंप दिया जाता है।
  • माल डिस्पैच होने के बाद गोदाम कंप्यूटर ग्राहक को ई-मेल द्वारा सूचित कर देता है कि उसका माल डिस्पैच हो गया है।
  • कोरिअर सर्विस द्वारा माल ग्राहक को दे दिया जाता है

इस पूरी प्रक्रिया में ग्राहक को केवल डिवाइस पर उत्पाद की खोज, आदेश एवं पेमेंट प्रोसेस के विकल्प दिखाई देते हैं।
शेष पूरी प्रक्रिया अदृश्य ही रहती है।

कंसाइनमेंट भेजने की सूचना में कोरिअर का नाम तथा कंसाइनमेंट नंबर की मदद से ग्राहक को कोरिअर की स्थिति ज्ञात होता रहती है।

“ई-कामर्स व्यापार” कैसे शुरू करें ?

ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू करने के लिए आपको एक नग वेबसाइट की जरूरत होगी।

इसे आप स्वयं की भी बना सकते हैं। अथवा दूसरे की वेबसाइट में शामिल हो कर भी उसका उपयोग कर सकते हैं।

ईकॉमर्स बिजनेस शुरू करने के लिए आपके पास दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।

अ) अपनी स्वयं की वेबसाइट पर काम करना ।
ब) अन्य वेबसाइट पर विक्रेता बनकर काम करना।

अ) अपनी स्वयं की वेबसाइट पर काम करना।

बहुत सारे ऐसे स्थापित आनलाइन मार्केट प्लेटफार्म भी उपलब्ध हैं। जिनके साथ मिल कर आप अपना ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू करने के लिए आप दो तरह की वेबसाइट बना सकते हैं।

(1) एकल विक्रेता वेबसाइट ।
(2) बहु-विक्रेता वेबसाइट ।

(1) एकल विक्रेता वेबसाइट में आप खुद के ब्रान्डेड उत्पादों को बेच कर लाभ से पैसे कमा सकेंगे।

(2) बहु विक्रेता वेबसाइट में आप दूसरे विक्रताओं को मार्केट प्लेटफार्म उपलब्ध करवाकर कमीशन प्राप्त कर पैसे कमा सकेंगे।

खुद की वेबसाइट बनाकर “ई-कामर्स व्यापार” शुरू करना।

आनलाइन बिजनेस की सफलता पूरी तरह वेबसाइट पर ही निर्भर होती है। इसलिए इस पर विशेष ध्यान देकर इसे बनाना चाहिए ।

यदि आपको अच्छा तकनीकी ज्ञान है तो आप खुद बनाएं, अन्यथा किसी पेशेवर वेब डिजाइनर से ही इसे बनवाना उचित होगा।

आपकी वेबसाइट सरल, आकर्षक तथा यूजर्स फ्रेंडली होना चाहिए। यह तुरंत खुल जाती हो। विजिटर्स के लिए इंटरेक्टिव एवं सुविधाजनक होना चाहिए।

इसमें “ई-कामर्स व्यापार” के लिए आवश्यक सभी टूल्स साफ्टवेयर उपलब्ध हों । यह एस ई ओ आप्टिमाइज्ड हो ।

विजीटर अपने पसंद के सामान सुरक्षित तरीकों से खरीद सकते हों ऐसी होना चाहिए।

अ) ई-कामर्स बिजनेस शुरू करने के लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना।

बिजनेस का संवैधानिक स्वरूप निर्धारित कर पंजीयन करवाएं। इस हेतु निम्न किसी एक का चुनाव करें।

i) ओ पी सी, ii) सीमित भागीदारी फर्म, iii) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी।

हमारी सलाह से “ईकामर्स व्यापार” शुरू करने के लिए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाना बेहतरीन विकल्प है।

(बिजनेस का स्वरूप निर्धारित करने संबंधित अधिक जानकारी लेख अपने बिजनेस का स्वरूप निर्धारित करें में पढ़ें)

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना के लिए आपके पास ये दस्तावेज होना चाहिए।

आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो पासपोर्ट साइज पंजीकृत कार्यालय प्रमाण हेतु भवन के दस्तावेज (किराए का भवन हो तो किराया नामा या उपयोगिता बिल )

ब) संस्थान का जीएसटी पंजीयन करवा कर जीएसटी पंंजीयन नंबर प्राप्त करना।

स) पंजीकृत बिजनेस संस्थान का पेनकार्ड भी बनवाना होगा।

द) व्यवसायिक लेनदेन हेतु संस्थान के पंजीकृत नाम से बैंक मेंं चालू खाता भी खुलवाना होगा।

इ) अपना एक डिजिटल सिग्नेचर भी बनवाना होगा।

अपने ऑनलाइन व्यवसाय को चलाने के लिए सभी आवश्यक लाइसेंस और परमिट प्राप्त कर लेवें।

जिससे आपको आगे भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े।

आप चाहें तो इन समस्त कार्यों के लिए किसी पेशेवर वकील अथवा चार्टर्ड अकाउंटेंट की सहायता ले सकते हैं।

वे आपके बिजनेस की आक्रति प्रकृति अनुसार सभी आवश्यक पंंजीयन एवं कानूनी औपचारिकताएं पूरी करवा देंगे।

[जी एस टी (गूड्स एवं सेवा कर) के संबंध में अधिक जानकारी के लिए लेख अवश्य पढ़ें]

2. डोमेन नेम एवं होस्टिंग खरीदना।

आनलाइन स्टोर शुरू करने के लिए आपको डोमेन एवं होस्टिंग खरीदना जरूरी होता है। क्योंकि बिजनेस की वेबसाइट इसी पर अपलोड की जाती है।

यह एक तरह से इंटरनेट की दुनिया में अपनी दुकान का नाम पता निर्धारित करना होता है।

इसलिए डोमेन नाम एवं बिजनेस का पंजीकृत नाम एक ही हो, या लगभग समान होना चाहिए।

कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए भी आपको कंपनी रजिस्ट्रार से कंपनी का नाम पहले मंजूर कराना होता है।

इसलिये कुछ ऐसा सामंजस्य बिठाएं कि डोमेन नाम और कंपनी का नाम में समानता हो।

3) बिजनेस की सुंदर वेबसाइट बनवाएं

एक सहज वेबसाइट बिल्डर की सहायता से आप खुद की बेहतरीन वेबसाइट बना सकते हैं।

यदि आपको अच्छा तकनीकी ज्ञान है, तो आप इसे खुद बनाएं अन्यथा किसी पेशेवर वेब डिजाइनर की सहायता से बनवाना उचित होगा।

आपकी वेबसाइट सरल, आकर्षक तथा यूजर्स फ्रेंडली होना चाहिए। यह तुरंत खुल जाती हो। विजिटर्स के लिए इंटरेक्टिव एवं सुविधाजनक होना चाहिए।

इसमें “ई-कामर्स व्यापार” के लिए आवश्यक सभी टूल्स साफ्टवेयर शॉपिंग कार्ट सर्विस, इन्वेन्ट्री मेनेजमेंट पेमेंट गेटवे आदि उपलब्ध हों पूरी तरह स्वचालित हों।

मेनुअली कम से कम काम करना पड़े।
यह एस ई ओ आप्टिमाइज्ड हो । विजीटर अपने पसंद के सामान सुरक्षित तरीकों से खरीद सकते हों।

कुछ ऐसी कंपनी हैं जो यह सभी काम करके देती हैं। जैसे बिगकामर्स शापिफाय ओपनकर्ट आदि।

4) शिपिंग की व्यवस्था
ग्राहकों को आदेशानुसार सामान की प्रदायगी के शिपिंग कंपनी की व्यवस्था करना होगा।

इसके लिए आप फर्स्ट फ्लाइट (First Flight) ब्लिउडार्ट (Bluedart) डीटीडीसी (Dtdc) या ऐसी ही अन्य कंपनी से जुड़ सकते हैं।

शिपरकेट (Shipercat)भारत का सबसे भरोसेमंद शिपिंग और वितरण समाधान प्रदाता है। आप इसकी भी सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

वेबसाइट में आपको अपनी व्यावसायिक नीतियां, संपर्क जानकारी, गोपनीयता नीति, वेबसाइट के नियम और शर्तें अस्वीकरण भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना चाहिए।

ब) अन्य वेबसाइट पर विक्रेता बनकर काम करना।

बहुत सारे ऐसे स्थापित आनलाइन मार्केट प्लेटफार्म भी उपलब्ध हैं। जिनके साथ मिल कर आप अपना ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

ई- कामर्स मार्केट प्लेटफार्म का मतलब वह बहु विक्रेता वेबसाइट जिसे आनलाइन खरीदी बिक्री करने वाला मार्केट प्लेस।

यानि एक तरह से आनलाइन व्यापार करने वाली जगह। इसे ऑनलाइन स्थापित बाजार स्थल भी कह सकते हैं)

ई-कामर्स मार्केटप्लेस से जुड़कर बिजनेस शुरू करने में समय और खर्च कम लगता है। और यह आसान भी है।

आप इनके साथ अपना विक्रेता खाता बनाएं और अपने उत्पादों को बेचना शुरू कर दें।

क्योंकि जिस वेबसाइट से आप मार्केट प्लेटफार्म प्राप्त करते हैं, वह आपको सभी सुविधाएं मुहैया कराती है।

इसमें वेबसाइट डिजाइनिंग, डेवलपमेंट, तकनीक एवं लाजिस्टिक आदि शामिल हैं।

ई-कामर्स मार्केटप्लेस के साथ काम शुरु करने के लिए बहुत कम कानूनी औपचारिकताओं की जरुरत होती है।

लगभग सभी मार्केटप्लेसेस अपनी वेबसाइट पर एकल स्वामित्व और पार्टनरशिप फर्मों को बेचने की अनुमति देते हैं। परंतु ये प्रारुप सीमित देयता संरक्षण नहीं देते हैं।

इसलिये मेरी सलाह है कि आपके लिए वन परसन कंपनी (ओपीसी) एलएलपी या सीमित दायित्व वाली कंपनी बनाकर काम शुरू करना ठीक रहेगा।

किसी भी वेबसाइट कंपनी में आवेदन करने के लिए आपके पास अपनी फर्म का एक बैंक खाता और जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर होना आवश्यक है।

इन कंपनियों के साथ “ई-कामर्स व्यापार” शुरू करने का सबसे बड़ा लाभ यह कि आप एक से ज्यादा मार्केटप्लेसों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।

कुछ लोकप्रिय मार्केटप्लेसों के नाम इस प्रकार हैं

अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, वॉलमार्ट, मिंत्रा, बिगबास्केट, ईबे, अलिबाबा, पेटीएम मॉल, स्नेपडील जबॉन्ग, फ़ैशनारा, लाइमरोड, येपमी, येभी, ग्रुपआन शॉपक्लूज इंडिया मार्ट फाइवर आदि।

आप जिस कंपनी के प्लेटफार्म पर काम करना चाहते हैं, उससे जुड़ने के लिए आपको उसकी वेबसाइट पर जाकर आनलाइन आवेदन करना होता है।

आवेदन प्रक्रिया लगभग सभी की एक समान ही होती है। अंतर केवल कार्य प्रणाली, नियम एवं शर्तों तथा प्राफिट शेयरिंग का ही होता है।

इससे संबंधित समस्त विवरण आप उनकी वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।

अधिकांश मार्केटप्लेसों के द्वारा प्रोडक्ट लिस्टिंग के लिए शुल्क लिया जाता है। एवं प्रत्येक लेनदेन पर कमीशन भी लिया जाता है। यह चयनित प्लेटफार्म के आधार पर कम ज्यादा भी हो सकता है।

यदि आपके पास वेब कोडिंग का कोई ज्ञान नहीं है, तब भी आप (सीएमएस) कन्टेन्ट मेनेजमेंट सिस्टम के द्वारा आसानी से उत्पाद सूची में नए आइटम जोड़ सकते हैं या कीमतें बदल सकते हैं।

इसके अलावा, जब बाजार में व्यापार करते हैं, तो आपको सुरक्षा मुद्दों और भुगतान गेटवे के बारे में भी चिंता करने की जरूरत नहीं होती है।

ऑनलाइन मार्केटप्लेस का एक और लाभ है। आपके उत्पाद के संभावित ग्राहक वहां पहले से ही मौजूद मिल जाते हैं।

इन ग्राहकों को मार्केटप्लेसों पर अच्छा भरोसा भी रहता है। इस करण आपको उत्पाद विक्रय में कम कठिनाई होती है।

आजकल सभी वेबसाइटों की डिजाइन इस तरह बनाई जा रही हैं कि वे मोबाइल एवं मोबाइल एप पर आसानी से देखी जा सकती हैं।

“ई-कॉमर्स व्यापार” मोबाइल बिजनेस एम-बिजनेस के नाम से भी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है।

M- बिजनेस (मोबाइल बिजनेस)

वर्तमान में मोबाइल का उपयोग सभी वर्ग के लोगों द्वारा हर जगह गांव तथा शहरों में बहुत अधिक हो रहा है ।

इसलिए मोबाइल एप्लिकेशन के द्वारा आनलाइन बिजनेस खूब लोकप्रिय हो रहा है।

सुरक्षा एवं धोखाधड़ी से बचने के लिए एप में पेमेंट गेटवे, SSL सर्टिफिकेट, इन्वेंटरी, टैक्स, एनक्रिप्टिंग प्रौद्योगिकी को जोड़ दिया गया है।

इसके अतिरिक्त आजकल आनलाइन बिजनेस सोशल मीडिया पर आनलाइन चैटिंग, कालिंग आदि अन्य माध्यमों के द्वारा भी खूब किया जा रहा है।

यदि आप सही योजना एवं रणनीति बनाकर, उसी अनुसार काम करते हैं, तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।

मित्रों, मुझे विश्वास है “ई-कामर्स व्यापार” बिजनेस करने का एक माडर्न तरीका” यह लेख आपको अवश्य अच्छा लगा होगा।

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धन्यवाद।


 

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